शासकीयकरण (Governmentality), कल्याण और बायोमेट्रिक राज्य
(Governmentality, Welfare and the Biometric State)
यह इकाई इस बात का विश्लेषण करती है कि आधुनिक राज्य केवल क़ानून और दमन के माध्यम से ही नहीं, बल्कि अधिक सूक्ष्म, व्यापक और दैनिक जीवन में रची-बसी सत्ता की तकनीकों के ज़रिये भी शासन करता है। संप्रभुता या वर्ग-प्रभुत्व पर केंद्रित शास्त्रीय सिद्धांतों से आगे बढ़ते हुए, आलोचनात्मक राजनीतिक सिद्धांत शासकीयकरण (governmentality), कल्याणकारी शासन और बायोमेट्रिक तकनीकों को समकालीन राज्य-सत्ता की केंद्रीय विशेषताओं के रूप में चिन्हित करता है। ये सभी मिलकर राज्य की प्रकृति में आए परिवर्तन को उजागर करते हैं—जहाँ राज्य केवल क्षेत्र और प्रजा पर शासन नहीं करता, बल्कि जनसंख्या, जोखिम और स्वयं जीवन का प्रबंधन करता है।
संप्रभुता से शासकीयकरण की ओर
परंपरागत राजनीतिक सिद्धांत राज्य-सत्ता को मुख्यतः संप्रभुता के रूप में समझता था—अर्थात् किसी क्षेत्र के भीतर क़ानून बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार। किंतु यह दृष्टि यह समझाने में असमर्थ है कि आधुनिक उदार और उत्तर–उदार समाजों में राज्य सामाजिक जीवन को कैसे नियंत्रित करता है।
Michel Foucault द्वारा विकसित शासकीयकरण (governmentality) की अवधारणा राज्य के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाती है। शासकीयकरण का अर्थ है—संकीर्ण संस्थागत अर्थों में राज्य से आगे जाकर “शासन करने की कला”। यह इस बात पर केंद्रित है कि सत्ता ज्ञान, मानदंड, विशेषज्ञता और तकनीकों के माध्यम से कैसे कार्य करती है, जिनका उद्देश्य व्यक्तियों और जनसंख्या के आचरण को दिशा देना होता है।
आधुनिक राज्य केवल बल प्रयोग से शासन नहीं करता; वह व्यक्तियों की पसंद, व्यवहार और क्षमताओं को इस तरह गढ़ता है कि लोग स्वयं ही राज्य-निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप अपने आचरण को नियंत्रित करने लगें।
जनसंख्या, ज्ञान और बायोपॉलिटिक्स
शासकीयकरण के केंद्र में जनसंख्या का उभार शासन के प्रमुख लक्ष्य के रूप में होता है। संप्रभुता जहाँ क्षेत्र और आज्ञाकारिता पर केंद्रित थी, वहीं शासकीयकरण जीवन पर केंद्रित है—जैसे जन्म-दर, स्वास्थ्य, मृत्यु-दर, उत्पादकता और सुरक्षा।
यह सत्ता-रूप बायोपॉलिटिक्स से जुड़ा है, जिसमें राज्य आँकड़ों, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक नीतियों के माध्यम से जीवन को अनुकूलित करने का प्रयास करता है। जनगणना, सर्वेक्षण और जोखिम-आकलन जैसी ज्ञान-प्रथाएँ राज्य को समाज को मापने, वर्गीकृत करने और उसमें हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाती हैं।
इस प्रकार बायोपॉलिटिकल शासन देखभाल और नियंत्रण के बीच की सीमा को धुँधला कर देता है। कल्याण और विकास के नाम पर चलाई जाने वाली नीतियाँ एक साथ नियमन के उपकरण भी बन जाती हैं।
शासन के रूप में कल्याणकारी राज्य
कल्याणकारी राज्य आधुनिक राज्य-सत्ता के सबसे महत्वपूर्ण रूपांतरणों में से एक है। केवल दमन पर निर्भर रहने के बजाय, कल्याणकारी शासन संरक्षण, प्रावधान और निवारण के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करता है।
शासकीयकरण के दृष्टिकोण से कल्याण केवल गरीबी या असमानता के प्रति नैतिक प्रतिक्रिया नहीं है। यह जनसंख्या को प्रबंधित करने की तकनीक है—जिसका उद्देश्य एक स्वस्थ, उत्पादक और अनुशासित श्रम-शक्ति सुनिश्चित करना है। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास पूँजीवादी समाजों में जोखिमों को कम करते हैं और नागरिकों को राज्य के नियामक ढाँचे में समाहित करते हैं।
इस प्रकार कल्याण नागरिकों को एक साथ संरक्षित भी करता है और शासित भी।
नवउदारवादी शासकीयकरण और कल्याण का पुनर्गठन
बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से कल्याणकारी शासन का पुनर्गठन नवउदारवाद के अंतर्गत हुआ। नवउदारवादी शासकीयकरण राज्य-सत्ता को समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे पुनर्संरचित करता है।
नवउदारवाद के अंतर्गत व्यक्तियों को उद्यमी विषय (entrepreneurial subjects) के रूप में गढ़ा जाता है, जो बाज़ारों के माध्यम से अपने जोखिमों का स्वयं प्रबंधन करें। कल्याण प्रावधानों को घटाया जाता है, निजीकरण किया जाता है या शर्तों से जोड़ा जाता है, जबकि निगरानी, मूल्यांकन और अनुशासन की तकनीकों का विस्तार होता है।
यह सामूहिक कल्याण से व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी की ओर संक्रमण को दर्शाता है, जहाँ सामाजिक समस्याओं को संरचनात्मक असमानता के बजाय व्यक्तिगत विफलता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
बायोमेट्रिक राज्य: डेटा और पहचान के माध्यम से शासन
समकालीन शासन की एक प्रमुख विशेषता बायोमेट्रिक राज्य का उदय है—जहाँ राज्य डिजिटल पहचान, डेटा-संग्रह और एल्गोरिदमिक प्रबंधन के माध्यम से जनसंख्या का शासन करता है।
उँगलियों के निशान, चेहरे की पहचान, आईरिस स्कैन और केंद्रीकृत डेटाबेस जैसी बायोमेट्रिक तकनीकें राज्य को व्यक्तियों की विशिष्ट पहचान स्थापित करने और उसे कल्याण, सुरक्षा तथा नागरिक अधिकारों से जोड़ने में सक्षम बनाती हैं। ये तकनीकें दक्षता, समावेशन और पारदर्शिता का वादा करती हैं।
किंतु आलोचनात्मक विद्वानों का तर्क है कि बायोमेट्रिक्स निगरानी और बहिष्करण को भी गहरा करता है। नागरिक डेटा-विषयों में बदल जाते हैं और अधिकारों तक पहुँच सफल पहचान पर निर्भर हो जाती है। त्रुटियाँ, बहिष्करण और डेटा-दुरुपयोग का भार असमान रूप से हाशिए के समुदायों पर पड़ता है।
इस प्रकार बायोमेट्रिक राज्य शासकीयकरण की तीव्रता को दर्शाता है, जहाँ शासन निरंतर निगरानी के माध्यम से संचालित होता है।
कल्याण, बायोमेट्रिक्स और सशर्त नागरिकता
जब कल्याणकारी शासन बायोमेट्रिक तकनीकों से जुड़ता है, तो नागरिकता स्वयं सशर्त और श्रेणीबद्ध हो जाती है। भोजन, स्वास्थ्य, पेंशन या आवागमन तक पहुँच डिजिटल सत्यापन पर निर्भर होने लगती है।
जो लोग राज्य के लिए “पठनीय” (legible) होते हैं, उन्हें लाभ मिलता है; जबकि डेटाबेस से बाहर रहने वाले—जैसे प्रवासी, अनौपचारिक श्रमिक और बेघर—असुरक्षा का सामना करते हैं।
आलोचनात्मक दृष्टि से बायोमेट्रिक कल्याण केवल लाभ-वितरण नहीं करता, बल्कि राज्य और नागरिक के संबंध को पुनर्परिभाषित करता है—अधिकार आधारित पात्रता से तकनीकी स्वीकृति की ओर।
सत्ता, सहमति और प्रतिरोध
शासकीयकरण केवल दमन के माध्यम से कार्य नहीं करता; यह बड़े पैमाने पर सहमति और सामान्यीकरण पर निर्भर करता है। लोग उत्पादकता, ज़िम्मेदारी और आत्म-प्रबंधन के मानदंडों को आत्मसात कर लेते हैं और अपना आचरण राज्य-लक्ष्यों के अनुरूप ढाल लेते हैं।
साथ ही, कल्याण और बायोमेट्रिक प्रणालियाँ प्रतिरोध भी उत्पन्न करती हैं। बहिष्करण को चुनौती दी जाती है, डेटा-शासन पर सवाल उठते हैं और लोग रोज़मर्रा के स्तर पर शासन से मोलभाव करते हैं। अनौपचारिकता, टालमटोल और विरोध शासकीय सत्ता की सीमाओं को उजागर करते हैं।
इसलिए शासकीयकरण को एक विवादित प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए, न कि सर्वग्रासी शक्ति के रूप में।
वैश्विक और उत्तर–औपनिवेशिक आयाम
उत्तर–औपनिवेशिक संदर्भों में शासकीयकरण और बायोमेट्रिक्स औपनिवेशिक निगरानी और नियंत्रण के इतिहासों से जुड़ जाते हैं। कभी औपनिवेशिक जनसंख्या को वर्गीकृत और नियंत्रित करने की तकनीकें आज डिजिटल प्रौद्योगिकियों और विकास नीतियों के माध्यम से नए रूप में सामने आती हैं।
कल्याण और बायोमेट्रिक शासन असमान रूप से संचालित होते हैं, जिससे भेदित नागरिकता और मौजूदा असमानताएँ और मज़बूत होती हैं। इससे शासकीयकरण को वैश्विक सत्ता-संबंधों और ऐतिहासिक विरासतों के भीतर रखकर समझने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
निष्कर्ष: आधुनिक राज्य पर पुनर्विचार
शासकीयकरण, कल्याण और बायोमेट्रिक तकनीकें यह दिखाती हैं कि आधुनिक राज्य-सत्ता किस प्रकार रूपांतरित हुई है। राज्य अब केवल आदेश और दमन से शासन नहीं करता, बल्कि देखभाल, गणना और निरंतर निगरानी के माध्यम से सत्ता का प्रयोग करता है।
यद्यपि कल्याण और बायोमेट्रिक्स समावेशन और दक्षता का वादा करते हैं, वे निगरानी और सशर्तता का विस्तार भी करते हैं। इन गतिशीलताओं को समझना समकालीन शासन, नागरिकता और लोकतंत्र के विश्लेषण के लिए अनिवार्य है।
यह इकाई दर्शाती है कि आधुनिक राज्य को किसी स्थिर संस्था के रूप में नहीं, बल्कि जीवन, जनसंख्या और सामाजिक व्यवस्था के शासन की बदलती तकनीकों के रूप में समझना चाहिए।
संदर्भ (References)
- Foucault, Michel. Security, Territory, Population
- Foucault, Michel. The Birth of Biopolitics
- Rose, Nikolas. Powers of Freedom
- Scott, James C. Seeing Like a State
- Dean, Mitchell. Governmentality: Power and Rule in Modern Society