लोकतंत्र, विकास और मानव अधिकार: भारत
(भारतीय संदर्भ) लोकतंत्र, विकास और मानव अधिकार—ये तीनों अवधारणाएँ भारतीय राजनीतिक और संवैधानिक अनुभव के मूल में स्थित हैं। ये परस्पर गहराई से जुड़ी हुई हैं, परंतु इनके बीच सामंजस्य हमेशा सहज नहीं रहा है। भारत एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करता है जहाँ दीर्घकालिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ गंभीर सामाजिक–आर्थिक असमानताएँ, असमान विकास और निरंतर…