नव लोक सेवा (New Public Service)
भूमिका (Introduction)
नव लोक सेवा (New Public Service – NPS) 1990 और 2000 के दशक में मानव-केंद्रित और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण के रूप में उभरी, जो नव लोक प्रबंधन (NPM) की प्रबंधकीय और बाज़ार-केंद्रित नीतियों का विकल्प प्रस्तुत करती है। जहाँ NPM दक्षता, प्रदर्शन मीट्रिक और बाजार आधारित यंत्र पर जोर देता है, वहीं NPS का फोकस लोकतांत्रिक शासन, नागरिक सहभागिता और लोकहित पर होता है।

इस दृष्टिकोण के अनुसार, सार्वजनिक प्रशासक केवल संसाधन प्रबंधक नहीं बल्कि लोकतंत्र और समुदाय के मूल्यों के संरक्षक होते हैं। NPS के प्रमुख विद्वान जनेट वी. डेनहार्ड्ट और रॉबर्ट बी. डेनहार्ड्ट हैं, जिन्होंने तर्क दिया कि सार्वजनिक सेवा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता नहीं बल्कि नागरिकों की सेवा, नागरिकता को प्रोत्साहित करना और लोकतांत्रिक शासन की गुणवत्ता बढ़ाना होना चाहिए।
ऐतिहासिक और बौद्धिक पृष्ठभूमि
20वीं सदी के उत्तरार्ध तक, NPM की सीमाएँ स्पष्ट हो गई थीं। कई देशों में दक्षता बढ़ी, लेकिन समानता, लोकतांत्रिक जवाबदेही और नागरिक विश्वास की अनदेखी हुई। नौकरशाही का खंडित ढांचा, प्रतिस्पर्धा पर अत्यधिक जोर और प्रबंधकीय दृष्टिकोण ने विद्वानों को यह सोचने पर मजबूर किया कि प्रशासन को लोकतांत्रिक समाज में नागरिक-केंद्रित होना चाहिए।
जनेट और रॉबर्ट डेनहार्ड्ट का The New Public Service: Serving, Not Steering (2000) इस दृष्टिकोण का बौद्धिक आधार बना। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक प्रशासन को समाज को केवल “संचालित” नहीं करना चाहिए, बल्कि नागरिकों की सेवा, सहभागिता और लोकहित सुनिश्चित करना इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
NPS के मूल सिद्धांत
नव लोक सेवा निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:
- नागरिकों की सेवा, केवल ग्राहकों की नहीं: प्रशासक केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि नागरिक कल्याण के संरक्षक हैं।
- लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता: निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी, पारदर्शिता और सहयोगी शासन को बढ़ावा देना।
- लोकहित केंद्रीय: नीति और प्रशासन का उद्देश्य केवल दक्षता नहीं बल्कि समाज के मूल्यों और सामूहिक भलाई को प्राथमिकता देना।
- नैतिक जिम्मेदारी और अखंडता: प्रशासक केवल परिणामों के लिए नहीं, बल्कि प्रक्रिया, निष्पक्षता और नैतिकता के लिए भी जिम्मेदार हैं।
- सहयोग और समुदाय निर्माण: सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना।
रॉबर्ट बी. डेनहार्ड्ट के अनुसार:
“Public servants do not exist to control or manage society; they exist to serve the public and uphold democratic governance.”
अन्य प्रशासनिक दृष्टिकोणों से तुलना
- पारंपरिक लोक प्रशासन (TPA): पदानुक्रम और नियम-केंद्रित। NPS लोकतांत्रिक सहभागिता और नागरिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देता है।
- नव लोक प्रबंधन (NPM): दक्षता और प्रबंधकीयता पर जोर। NPS इसे आलोचना करता है क्योंकि यह नागरिकों की आवाज़ और सार्वजनिक मूल्यों को नजरअंदाज कर देता है।
- नव लोक प्रशासन (NPA): सामाजिक समानता और नैतिक जिम्मेदारी पर ध्यान। NPS अधिक स्पष्ट रूप से सहभागी और नागरिक-केंद्रित है।
कार्यान्वयन रणनीतियाँ
NPS को अपनाने वाले प्रशासनिक सुधार में निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:
- सहभागी योजना और निर्णय-निर्माण: नीतियों और सेवा वितरण के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी।
- सहयोगी शासन: सरकारी एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और समुदाय समूहों के बीच साझेदारी।
- पारदर्शिता और जवाबदेही के तंत्र: जानकारी की खुली पहुँच, सार्वजनिक परामर्श और हितधारक सहभागिता।
- नैतिकता और मूल्य-संवेदनशील प्रशासन: प्रशिक्षण और संगठनात्मक संस्कृति जो अखंडता और निष्पक्षता को बढ़ावा देती है।
इन उपायों से प्रशासकों की भूमिका संसाधन प्रबंधक से लोकतंत्र के संवाहक में बदल जाती है।
प्रमुख विचारक
जनेट वी. डेनहार्ड्ट और रॉबर्ट बी. डेनहार्ड्ट: NPS के मुख्य वास्तुकार। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा स्वाभाविक रूप से नागरिक-केंद्रित, नैतिक और समुदाय-केंद्रित है। उन्होंने NPM की तकनीकी और दक्षता-केंद्रित दृष्टि की आलोचना की।
अन्य प्रभाव: NPS ने लोकतांत्रिक सिद्धांत, समुदाय विकास और सहभागिता आधारित शासन से प्रेरणा ली है। इसका उद्देश्य प्रशासन में सेवा, नागरिकता और सार्वजनिक सहभागिता को प्राथमिकता देना है।
आलोचना
NPS के आदर्शवादी दृष्टिकोण को लेकर आलोचनाएँ भी हैं:
- कार्यान्वयन की जटिलता: सहभागिता और सहयोगी प्रक्रियाएँ धीमी और जटिल होती हैं।
- संभावित दक्षता हानि: नागरिक सहभागिता को प्राथमिकता देने से अल्पकालिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
- लोकहित की व्याख्या में अस्पष्टता: “लोकहित” का निर्धारण संदर्भ और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
- सीमित वैश्विक अपनत्व: NPM की तुलना में NPS अधिक नैतिक और सैद्धांतिक दृष्टिकोण है।
समकालीन प्रासंगिकता
NPS आज भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिक विश्वास के संदर्भ में। आधुनिक प्रशासनिक सुधार जैसे ई-गवर्नेंस, सहभागिता आधारित बजटिंग, नागरिक सलाहकार बोर्ड और सामाजिक जवाबदेही तंत्र NPS के सिद्धांतों को दर्शाते हैं।
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में NPS को लोक सेवा नेतृत्व, समुदाय सहभागिता और सेवा नैतिकता में लागू किया जा रहा है। भारत में भी स्थानीय निकायों में नागरिक सहभागिता और शिकायत निवारण तंत्र NPS के तत्वों को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
नव लोक सेवा प्रशासन में नागरिक-केंद्रित, सहभागात्मक और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। दक्षता और प्रबंधकीय दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन NPS का तर्क है कि सार्वजनिक प्रशासन का अंतिम उद्देश्य नागरिकों की सेवा, लोकतंत्र को सशक्त करना और लोकहित बनाए रखना होना चाहिए। NPS प्रशासनिक विचार में NPM और पारंपरिक मॉडल के लिए एक नैतिक और सहभागात्मक विकल्प प्रस्तुत करता है।
References / Suggested Readings
- Janet V. Denhardt & Robert B. Denhardt – The New Public Service: Serving, Not Steering (2000)
- Dwight Waldo – The Administrative State
- H. George Frederickson – New Public Administration
- Christopher Hood – A Public Management for All Seasons
- Osborne & Gaebler – Reinventing Government
- Fadia & Fadia – Public Administration
FAQs
Q1. New Public Service क्या है?
NPS एक नागरिक-केंद्रित, सहभागात्मक और नैतिक दृष्टिकोण है जो सार्वजनिक प्रशासन में लोकहित, लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता को प्राथमिकता देता है।
Q2. NPS और NPM में अंतर क्या है?
NPM दक्षता और प्रबंधकीयता पर केंद्रित है, जबकि NPS नागरिकों की सेवा, लोकतांत्रिक सहभागिता और सार्वजनिक मूल्यों को प्राथमिकता देता है।
Q3. क्या NPS आज भी लागू किया जा सकता है?
हाँ, इसके सिद्धांत सहभागिता आधारित शासन, नागरिक सलाहकार बोर्ड, ई-गवर्नेंस और सामुदायिक साझेदारी में वैश्विक और भारतीय संदर्भों में लागू होते हैं।