संविधान का दर्शन (Philosophy of the Constitution)
भूमिका संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज़ नहीं होता जो राज्य की संस्थाओं की स्थापना करता है और शक्तियों का वितरण करता है; वह किसी समाज की सामूहिक नैतिक, राजनीतिक और दार्शनिक प्रतिबद्धताओं का घोषणापत्र भी होता है। संविधान का दर्शन उन मूल विचारों, मूल्यों और सिद्धांतों को संदर्भित करता है जो संविधान की संरचना, उसकी…