राष्ट्र, राष्ट्रवाद और समावेशी नागरिकता
बी. आर. आंबेडकर के राजनीतिक चिंतन में राष्ट्र और राष्ट्रवाद का प्रश्न अत्यंत केंद्रीय रहा है, किंतु उनका दृष्टिकोण भारत के प्रचलित राष्ट्रवादी विमर्श से मूलतः भिन्न था। आंबेडकर के लिए राष्ट्र कोई सांस्कृतिक, धार्मिक या भावनात्मक रूप से पहले से मौजूद इकाई नहीं था, और न ही राष्ट्रवाद अपने आप में कोई नैतिक आदर्श।…