उभरते मुद्दे और समकालीन चुनौतियाँ: शांति और सुरक्षा
(Emerging Issues and Contemporary Challenges: Peace and Security)
भारत और इज़राइल
समकालीन राजनीति में शांति और सुरक्षा सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण मुद्दों में से हैं। शीत युद्ध के बाद के दौर में सुरक्षा की अवधारणा केवल सैन्य रक्षा या युद्ध की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें आंतरिक संघर्ष, आतंकवाद, सीमा विवाद, मानव सुरक्षा, नागरिक स्वतंत्रताएँ और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसे आयाम भी शामिल हो गए हैं।
India और Israel—दोनों ही ऐसे राज्य हैं जो ऐतिहासिक संघर्षों, जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आंतरिक विविधताओं के कारण शांति और सुरक्षा की निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
यह इकाई भारत और इज़राइल में शांति और सुरक्षा को एक उभरते और समकालीन मुद्दे के रूप में विश्लेषित करती है।
समकालीन राजनीति में शांति और सुरक्षा की पुनर्व्याख्या
परंपरागत रूप से सुरक्षा को राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा से जोड़ा जाता था, जबकि शांति को युद्ध की अनुपस्थिति माना जाता था। किंतु आज यह स्पष्ट हो चुका है कि स्थायी शांति केवल सैन्य शक्ति से संभव नहीं है।
समकालीन सुरक्षा विमर्श में शामिल हैं—
- आतंकवाद और असममित युद्ध
- सीमा विवाद और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता
- आंतरिक विद्रोह और अलगाववाद
- मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रताएँ
- लोकतंत्र पर सुरक्षा नीतियों का प्रभाव
भारत और इज़राइल दोनों में शांति और सुरक्षा इन सभी आयामों से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
भारत: विविधता और अस्थिर परिवेश में सुरक्षा की चुनौती
भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ बाहरी और आंतरिक—दोनों स्तरों पर मौजूद हैं। बाहरी स्तर पर सीमा विवादों और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाओं ने भारत की सुरक्षा नीति को आकार दिया है। इसके चलते सैन्य तैयारी, रणनीतिक संतुलन और कूटनीति को विशेष महत्व मिला है।
आंतरिक स्तर पर भारत को विविध सामाजिक संरचना और असमान विकास से जुड़ी सुरक्षा समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में उग्रवाद, अलगाववादी आंदोलन और राजनीतिक हिंसा ने शांति को प्रभावित किया है।
भारत का सुरक्षा दृष्टिकोण इसलिए केवल सैन्य शक्ति पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें संवैधानिक उपाय, लोकतांत्रिक संस्थाएँ और संघीय समायोजन भी शामिल हैं।
भारत में आंतरिक सुरक्षा और शांति का प्रश्न
भारत में आंतरिक सुरक्षा शांति के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। जातीय, क्षेत्रीय और वैचारिक संघर्षों ने समय-समय पर सामाजिक स्थिरता को प्रभावित किया है। राज्य ने इन चुनौतियों का सामना बल-प्रयोग के साथ-साथ संवाद, विकास और राजनीतिक समाधान के माध्यम से करने का प्रयास किया है।
हालाँकि, विशेष सुरक्षा क़ानूनों और लंबे समय तक सैन्य उपस्थिति ने नागरिक स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों को लेकर बहसें भी खड़ी की हैं। इससे यह प्रश्न उठता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांति बनाए रखते हुए सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
इज़राइल: राज्य की आधारभूत चिंता के रूप में सुरक्षा
इज़राइल में शांति और सुरक्षा राज्य की स्थापना से ही केंद्रीय चिंता रहे हैं। युद्ध, विस्थापन और क्षेत्रीय शत्रुता के अनुभवों ने सुरक्षा को राष्ट्रीय पहचान और नीति-निर्माण का मूल तत्व बना दिया है।
इज़राइल को बाहरी खतरों के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों—विशेषकर विवादित क्षेत्रों और अल्पसंख्यक संबंधों—का सामना करना पड़ता है। परिणामस्वरूप, सुरक्षा केवल एक नीति-क्षेत्र नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिक संरचनात्मक अवधारणा बन गई है।
सैन्यीकरण और सुरक्षा की राजनीति (इज़राइल)
इज़राइल की सुरक्षा परिस्थितियों ने समाज और राज्य के व्यापक सैन्यीकरण को जन्म दिया है। सैन्य संस्थाएँ, राजनीतिक नेतृत्व और नागरिक जीवन गहराई से जुड़े हुए हैं। सुरक्षा सिद्धांतों में प्रतिरोध (deterrence), पूर्व-प्रहार (pre-emption) और तकनीकी श्रेष्ठता पर ज़ोर दिया जाता है।
हालाँकि ये उपाय अस्तित्व की रक्षा के लिए आवश्यक माने जाते हैं, पर वे लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी दबाव डालते हैं। आपातकालीन शक्तियाँ, निगरानी तंत्र और असहमति पर प्रतिबंध—अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर—लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व से जुड़े सवाल खड़े करते हैं।
शांति प्रक्रियाएँ और उनकी सीमाएँ
भारत और इज़राइल—दोनों ने शांति स्थापित करने के लिए राजनीतिक वार्ताओं और प्रक्रियाओं का सहारा लिया है, किंतु उनकी सफलता सीमित रही है।
भारत में शांति-प्रयासों में वार्ता, विश्वास-निर्माण के उपाय और क्षेत्रीय समझौते शामिल रहे हैं। कुछ संघर्षों में कमी आई है, पर कई समस्याएँ संरचनात्मक असमानताओं और अधूरे राजनीतिक समाधान के कारण बनी हुई हैं।
इज़राइल में शांति प्रयास मुख्यतः कूटनीतिक समझौतों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहे हैं, किंतु हिंसा और अविश्वास ने स्थायी शांति की संभावनाओं को सीमित किया है।
यह स्पष्ट करता है कि शांति केवल सुरक्षा व्यवस्था का परिणाम नहीं, बल्कि राजनीतिक समावेशन और वैधता से जुड़ी प्रक्रिया है।
सुरक्षा, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताएँ
दोनों देशों में एक प्रमुख समकालीन चुनौती है—सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन। कठोर सुरक्षा नीतियाँ नागरिक अधिकारों को सीमित कर सकती हैं और असाधारण उपायों को सामान्य बना सकती हैं।
भारत में न्यायपालिका, चुनाव और नागरिक समाज ने कई बार सुरक्षा नीतियों पर प्रश्न उठाए हैं, हालाँकि उनकी प्रभावशीलता भिन्न-भिन्न रही है।
इज़राइल में सुरक्षा पर सार्वजनिक बहस तीव्र है, किंतु अक्सर सुरक्षा आवश्यकताएँ समानता और अधिकारों के प्रश्नों पर हावी हो जाती हैं, विशेषकर अल्पसंख्यकों के संदर्भ में।
तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत और इज़राइल
- दोनों राज्य निरंतर सुरक्षा खतरों का सामना करते हैं
- भारत सुरक्षा के साथ संवैधानिकता और राजनीतिक समायोजन पर ज़ोर देता है
- इज़राइल सुरक्षा, सैन्य तैयारी और प्रतिरोध को प्राथमिकता देता है
- दोनों ही लोकतंत्रों में नागरिक स्वतंत्रताएँ दबाव में रहती हैं, हालाँकि अलग-अलग रूपों में
ये अंतर ऐतिहासिक अनुभवों और भू-राजनीतिक संदर्भों से उत्पन्न होते हैं।
इक्कीसवीं सदी की उभरती चुनौतियाँ
नए वैश्विक परिवर्तनों ने शांति और सुरक्षा को और जटिल बना दिया है—
- अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
- साइबर सुरक्षा और निगरानी
- क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलते गठबंधन
- आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के बीच धुंधली होती सीमाएँ
भारत और इज़राइल दोनों ने सुरक्षा तंत्रों के आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाया है, जिससे संप्रभुता और जवाबदेही के नए प्रश्न उभरे हैं।
निष्कर्ष
भारत और इज़राइल में शांति और सुरक्षा स्थिर अवधारणाएँ नहीं, बल्कि निरंतर विकसित होती राजनीतिक प्रक्रियाएँ हैं। भारत का अनुभव दर्शाता है कि विविध लोकतंत्र में शांति बनाए रखना सैन्य शक्ति, संवैधानिक उपायों और राजनीतिक समायोजन के संतुलन पर निर्भर करता है। इज़राइल का अनुभव यह दिखाता है कि स्थायी सुरक्षा चिंता के वातावरण में लोकतंत्र और शांति को बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इन दोनों मामलों से यह स्पष्ट होता है कि शांति और सुरक्षा केवल रणनीतिक लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि वे इतिहास, पहचान और सत्ता-संबंधों से गहराई से जुड़ी हुई प्रक्रियाएँ हैं। समकालीन राजनीति को समझने के लिए इनका विश्लेषण अनिवार्य है।
संदर्भ (References)
- Buzan, Barry. People, States and Fear
- Tilly, Charles. Coercion, Capital and European States
- Ayoob, Mohammed. The Third World Security Predicament
- Shindler, Colin. A History of Modern Israel
- Khilnani, Sunil. The Idea of India