रणनीतिक / सामरिक मतदान (Strategic / Tactical Voting)
रणनीतिक या सामरिक मतदान उस प्रकार के मतदान व्यवहार को कहा जाता है जिसमें मतदाता अपने सर्वाधिक पसंदीदा उम्मीदवार या दल को वोट देने के बजाय, चुनावी परिणाम को प्रभावित करने के उद्देश्य से सोच-समझकर मतदान करता है। इस प्रकार के मतदान में मतदाता यह नहीं पूछता कि “मुझे कौन सबसे अच्छा लगता है?” बल्कि यह विचार करता है कि “कौन-सा विकल्प वांछित या कम से कम अवांछित परिणाम दे सकता है?”
भारतीय लोकतंत्र में, जहाँ चुनाव बहुकोणीय, प्रतिस्पर्धात्मक और गठबंधन-आधारित होते हैं, रणनीतिक मतदान मतदान व्यवहार का एक महत्वपूर्ण आयाम बन चुका है।
रणनीतिक / सामरिक मतदान: अवधारणा और अर्थ
रणनीतिक मतदान उस स्थिति में होता है जब मतदाता—
- संभावित चुनावी परिणामों का अनुमान लगाता है
- उम्मीदवारों या दलों की जीतने की क्षमता का मूल्यांकन करता है
- अपने मत का प्रयोग लाभ को अधिकतम या नुकसान को न्यूनतम करने के लिए करता है
यह मतदान व्यवहार अभिव्यक्तिपरक मतदान (जहाँ मत पहचान या विचारधारा की अभिव्यक्ति होता है) से अलग है और उपयोगितावादी या साधनपरक मतदान पर आधारित होता है।
रणनीतिक मतदान के सैद्धांतिक आधार
रणनीतिक मतदान का संबंध तर्कसंगत चयन सिद्धांत (Rational Choice Theory) से है, जिसके अनुसार मतदाता एक विवेकशील इकाई होता है—
- जो लाभ–हानि का आकलन करता है
- जीत की संभावनाओं को तौलता है
- और उसके अनुसार मतदान करता है
विशेष रूप से प्रथम-पास-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली में रणनीतिक मतदान अधिक देखने को मिलता है, क्योंकि छोटे या कमजोर उम्मीदवार को दिया गया वोट अक्सर “व्यर्थ वोट” माना जाता है।
ईमानदार (Sincere) और रणनीतिक मतदान में अंतर
मतदान व्यवहार के अध्ययन में दो प्रकार के मतदान को अलग किया जाता है—
- ईमानदार मतदान – मतदाता अपनी वास्तविक पसंद के अनुसार मतदान करता है
- रणनीतिक मतदान – मतदाता परिणाम को प्रभावित करने के लिए अपनी पसंद में समझौता करता है
रणनीतिक मतदान राजनीतिक विवेक और गणना को दर्शाता है, जबकि ईमानदार मतदान राजनीतिक पहचान और आस्था को।
रणनीतिक मतदान को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियाँ
रणनीतिक मतदान निम्न परिस्थितियों में अधिक देखने को मिलता है—
- बहुकोणीय चुनाव
जब कई उम्मीदवार या दल मैदान में हों, तब मतदाता अपने वोट को रणनीतिक रूप से स्थानांतरित करता है। - कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले चुनाव
जब जीत–हार का अंतर कम होने की संभावना हो। - उच्च ध्रुवीकरण
जब चुनाव को “निर्णायक” या “उच्च जोखिम” वाला माना जाता है। - सूचना की उपलब्धता
जनमत सर्वेक्षण, मीडिया विश्लेषण और पिछले चुनावी आँकड़े रणनीतिक सोच को बढ़ाते हैं।
भारतीय संदर्भ में रणनीतिक मतदान
भारत में रणनीतिक मतदान राष्ट्रीय और प्रांतीय दोनों स्तरों पर देखा जाता है। इसके प्रमुख कारण हैं—
- FPTP चुनाव प्रणाली
- बहुदलीय प्रतिस्पर्धा
- गठबंधन राजनीति
- क्षेत्रीय दलों की मज़बूत उपस्थिति
मतदाता अक्सर—
- सत्तारूढ़ दल को हराने के लिए एक सक्षम विपक्षी को वोट देते हैं
- अपने पसंदीदा छोटे दल के बजाय गठबंधन के मज़बूत उम्मीदवार को चुनते हैं
- वैचारिक समानता से अधिक जीतने की संभावना को महत्व देते हैं
इसे कई बार “प्रतिरोधी रणनीतिक मतदान” भी कहा जाता है।
सामाजिक विभाजन और रणनीतिक मतदान
रणनीतिक मतदान प्रायः सामाजिक पहचान के साथ जुड़ा होता है—
- जाति समूह अपने वोट एकजुट कर सबसे मजबूत उम्मीदवार का समर्थन करते हैं
- धार्मिक या जातीय समुदाय सुरक्षा और प्रतिनिधित्व के लिए सामरिक निर्णय लेते हैं
- वंचित समूह छोटे दलों को छोड़कर प्रभावी विकल्प चुनते हैं
इस प्रकार रणनीतिक मतदान पहचान-आधारित राजनीति को समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे रणनीतिक रूप से पुनर्गठित करता है।
मीडिया, जनमत सर्वेक्षण और रणनीतिक मतदान
मीडिया और जनमत सर्वेक्षण रणनीतिक मतदान को बढ़ावा देते हैं—
- “फ्रंट रनर” उम्मीदवारों की पहचान
- जीत–हार की संभावनाओं का आकलन
- मतदाताओं को व्यर्थ वोट से बचने की प्रेरणा
हालाँकि इससे झुंड प्रभाव (bandwagon effect) भी उत्पन्न हो सकता है।
रणनीतिक मतदान के लोकतांत्रिक प्रभाव
रणनीतिक मतदान के प्रभाव दोहरे होते हैं—
सकारात्मक प्रभाव
- मतों की प्रभावशीलता बढ़ती है
- व्यावहारिक राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिलता है
- अत्यधिक विखंडन को रोका जा सकता है
नकारात्मक प्रभाव
- वैचारिक स्पष्टता कम होती है
- छोटे दल हाशिए पर चले जाते हैं
- “कम बुरा विकल्प” चुनने की प्रवृत्ति बढ़ती है
रणनीतिक मतदान और दलीय व्यवस्था
लगातार रणनीतिक मतदान—
- बड़े दलों को मज़बूत करता है
- छोटे दलों को गठबंधन की ओर धकेलता है
- चुनावी प्रतिस्पर्धा को द्विध्रुवीय या त्रिकोणीय बनाता है
भारत में इसने गठबंधन राजनीति और पूर्व-चुनावी गठबंधनों को बढ़ावा दिया है।
रणनीतिक मतदान और लोकतांत्रिक परिपक्वता
रणनीतिक मतदान को कई विद्वान लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत मानते हैं, क्योंकि यह दर्शाता है कि मतदाता—
- चुनावी नियमों को समझता है
- राजनीतिक संदर्भ का आकलन करता है
- अपने मत का प्रभाव जानता है
लेकिन अत्यधिक रणनीतिक मतदान राजनीतिक विकल्पों की कमी और लोकतांत्रिक असंतोष का संकेत भी हो सकता है।
निष्कर्ष
रणनीतिक या सामरिक मतदान आधुनिक मतदान व्यवहार का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। यह दर्शाता है कि मतदाता निष्क्रिय नहीं, बल्कि सचेत, गणनाशील और संदर्भ-संवेदनशील राजनीतिक अभिनेता हैं। भारत में बहुदलीय प्रतिस्पर्धा और गठबंधन राजनीति ने रणनीतिक मतदान को व्यापक बनाया है।
यद्यपि रणनीतिक मतदान मत की प्रभावशीलता बढ़ाता है, फिर भी यह प्रतिनिधित्व, वैचारिक विविधता और लोकतांत्रिक विकल्पों से जुड़े प्रश्न उठाता है।
इसलिए रणनीतिक मतदान को समझना भारतीय लोकतंत्र में पसंद, व्यवहारिकता और सत्ता के जटिल संबंध को समझने के लिए आवश्यक है।
संदर्भ (References)
- Downs, Anthony. An Economic Theory of Democracy
- Cox, Gary W. Making Votes Count
- Norris, Pippa. Electoral Engineering
- Dalton, Russell J. Citizen Politics
- Yadav, Yogendra. Understanding Indian Voters