नव लोक प्रबंधन : New Public Management – NPM
भूमिका (Introduction)
नव लोक प्रबंधन (New Public Management – NPM) 1970 और 1980 के दशक में पारंपरिक नौकरशाही प्रशासन की अक्षमताओं और कठोरताओं के जवाब में उभरा। जहाँ नव लोक प्रशासन (NPA) सामाजिक समानता, नैतिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व पर जोर देता था, वहीं NPM ने दक्षता, प्रदर्शन मूल्यांकन, बाज़ार आधारित यंत्र और प्रबंधकीय जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित किया।

NPM के बौद्धिक आधार में सार्वजनिक विकल्प सिद्धांत (public choice theory), प्रबंधकीय अर्थशास्त्र और बाज़ार-केंद्रित सुधार शामिल हैं। यह एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें नौकरशाही से प्रबंधकीय और परिणाम-केंद्रित प्रशासन की ओर परिवर्तन होता है। इसका मानना है कि सरकारें निजी क्षेत्र की तकनीकों जैसे प्रतिस्पर्धा, अनुबंध, और प्रदर्शन प्रोत्साहन को अपनाकर सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान कर सकती हैं।
ऐतिहासिक और बौद्धिक पृष्ठभूमि
1970 के दशक तक कई पश्चिमी देशों, विशेषकर यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड, आर्थिक संकट, बढ़ती सार्वजनिक व्यय और नागरिक असंतोष का सामना कर रहे थे। पारंपरिक नौकरशाही धीमी, कठोर और प्रक्रिया-आधारित होने के लिए आलोचना का पात्र बन गई।
NPM ने इस संदर्भ में सार्वजनिक क्षेत्र को ग्राहक-केंद्रित, परिणाम-केंद्रित और उत्तरदायी संगठनों में बदलने के लिए सुधारात्मक रणनीति प्रस्तुत की। नीतियों में प्रदर्शन मूल्यांकन, निजीकरण और सेवाओं का आउटसोर्सिंग इसे लागू करने के प्रमुख उपाय थे।
NPM के मुख्य सिद्धांत
NPM निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:
- विकेंद्रीकरण और स्वायत्तता: एजेंसियों को संचालन में स्वतंत्रता दी जाती है, लेकिन परिणामों के लिए जवाबदेह बनाया जाता है।
- प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रबंधन: आउटपुट, परिणाम और दक्षता को मापा जाता है, आमतौर पर प्रदर्शन संकेतक और बेंचमार्क के माध्यम से।
- बाज़ार आधारित यंत्र: प्रतिस्पर्धा, आउटसोर्सिंग और अर्ध-बाज़ार संरचनाओं को दक्षता बढ़ाने के लिए लागू किया जाता है।
- ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण: नागरिकों को ग्राहक माना जाता है और सेवा वितरण की गुणवत्ता नागरिक संतुष्टि के आधार पर आंकी जाती है।
- प्रबंधकीय जवाबदेही: नियमों का पालन करने की तुलना में प्रबंधन कौशल, नेतृत्व और परिणाम-उन्मुख मूल्यांकन पर जोर।
क्रिस्टोफर हूड (Christopher Hood) के अनुसार:
“NPM represents a shift from rule-driven, process-focused bureaucracy to management-oriented, results-focused administration.”
प्रमुख विचारक और प्रभाव
क्रिस्टोफर हूड (Christopher Hood): NPM के वैचारिक और व्यावहारिक आयामों को रेखांकित करते हैं, दक्षता, आउटपुट नियंत्रण और प्रदर्शन मूल्यांकन को आधुनिक शासन का केंद्रीय घटक मानते हैं।
डेविड ओसबॉर्न और टेड गैब्लर (David Osborne & Ted Gaebler): Reinventing Government में उन्होंने सुझाव दिया कि सार्वजनिक एजेंसियों को निजी उद्यमों की तरह संचालित किया जाना चाहिए, जिसमें नवाचार, उद्यमिता और ग्राहक संतुष्टि पर ध्यान हो।
नियो-लिबरल और सार्वजनिक विकल्प विचारक: जेम्स बुचानन और गॉर्डन टल्लॉक जैसे अर्थशास्त्री सरकारी हस्तक्षेप को कम करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और दक्षता सुधारने के लिए सिद्धांत प्रदान करते हैं।
कार्यान्वयन रणनीतियाँ
NPM अपनाने वाले सरकारों ने कई संरचनात्मक और प्रबंधकीय सुधार लागू किए हैं:
- सेवाओं का आउटसोर्सिंग: सार्वजनिक कार्यों को निजी या गैर-लाभकारी संस्थाओं को सौंपा जाता है।
- प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन: लक्ष्य प्राप्त करने वाले प्रबंधक और कर्मचारी पुरस्कार प्राप्त करते हैं।
- अधिकार का विकेंद्रीकरण: निर्णय लेने की शक्ति एजेंसी के निचले स्तरों को दी जाती है।
- बेंचमार्किंग और ऑडिटिंग: नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन परिणामों और दक्षता सुनिश्चित करता है।
इन उपायों ने प्रशासकों की भूमिका को नियम प्रवर्तनकर्ता से प्रबंधक और उद्यमी में बदल दिया।
पारंपरिक और NPA दृष्टिकोण के साथ तुलना
- पारंपरिक लोक प्रशासन: पदानुक्रम, नियम और प्रक्रिया-केंद्रित। NPM इसे धीमा और कठोर मानता है।
- नव लोक प्रशासन (NPA): सामाजिक समानता और नैतिक जिम्मेदारी पर जोर। NPM इसे अधिक आदर्शवादी और प्रदर्शन-केंद्रित नहीं मानता।
सारांश में, NPM प्रक्रियाओं पर परिणामों, पदानुक्रम पर प्रतिस्पर्धा, और नियमों पर प्रबंधकीय विवेक को प्राथमिकता देता है।
आलोचना
NPM को कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है:
- दक्षता पर अत्यधिक जोर: सेवाओं को “उत्पाद” मानने से समानता और सामाजिक न्याय की अनदेखी हो सकती है।
- सार्वजनिक सेवाओं का बाज़ारीकरण: नागरिकों को ग्राहक मानने से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर हो सकती है।
- खंडन और समन्वय की कमी: विकेंद्रीकरण और आउटसोर्सिंग से समन्वय और उत्तरदायित्व प्रभावित हो सकते हैं।
- प्रबंधकीय केंद्रीकरण: प्रबंधकों पर अत्यधिक निर्भरता पेशेवर विशेषज्ञता और सार्वजनिक मूल्यों को हाशिए पर डाल सकती है।
समकालीन प्रासंगिकता
NPM आज भी वैश्विक शासन में प्रभावशाली है। प्रदर्शन ऑडिट, परिणाम-आधारित प्रबंधन, निजीकरण और नागरिक-केंद्रित सेवाएँ NPM के सिद्धांतों को दर्शाती हैं। कई सरकारें NPM, पारंपरिक प्रशासन और NPA के मूल्य-संवेदनशील दृष्टिकोण का मिश्रण अपनाती हैं, जिससे हाइब्रिड प्रशासन मॉडल तैयार होता है।
भारत में NPM के तत्व ई-गवर्नेंस, प्रदर्शन-संबंधित सेवा वितरण और सार्वजनिक-निजी साझेदारी में देखे जा सकते हैं।
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निष्कर्ष
नव लोक प्रबंधन प्रशासन में प्रबंधकीय और परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। दक्षता, बाजार आधारित यंत्र और प्रदर्शन मूल्यांकन पर जोर इसे पारंपरिक नौकरशाही और NPA से अलग बनाता है। जबकि आलोचना की जाती है कि यह सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की अनदेखी कर सकता है, NPM ने आधुनिक प्रशासनिक अभ्यास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है।
References / Suggested Readings
- Christopher Hood – A Public Management for All Seasons
- David Osborne & Ted Gaebler – Reinventing Government
- Anthony G. Miller – New Public Management
- Peter F. Drucker – Management Challenges for the 21st Century
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
FAQs
Q1. NPM क्या है?
यह एक प्रशासनिक दृष्टिकोण है जो दक्षता, प्रदर्शन, बाज़ार आधारित यंत्र और प्रबंधकीय जवाबदेही पर जोर देता है, और इसे निजी क्षेत्र की तकनीकों से प्रेरित माना जाता है।
Q2. NPM और NPA में क्या अंतर है?
NPA सामाजिक समानता, नैतिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व पर केंद्रित है, जबकि NPM दक्षता, प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रबंधकीय विवेक को प्राथमिकता देता है।
Q3. क्या NPM आज भी प्रासंगिक है?
हाँ, NPM के सिद्धांत परिणाम-आधारित प्रबंधन, प्रदर्शन ऑडिट और नागरिक-केंद्रित सेवाओं में वैश्विक स्तर पर प्रभावी हैं, विशेषकर भारत में।