प्रेरणा (Motivation): अब्राहम मास्लो
भूमिका (Introduction)
प्रेरणा प्रशासनिक सिद्धांत और संगठनात्मक व्यवहार का मूल आधार है, जो कर्मचारी प्रदर्शन, कार्य संतोष और संस्था की समग्र प्रभावशीलता को प्रभावित करता है। प्रेरणा के प्रमुख विचारकों में अब्राहम एच. मास्लो (1908–1970) विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने मानव आवश्यकताओं के पदानुक्रम (Hierarchy of Needs) के माध्यम से व्यक्तिगत व्यवहार के प्रेरक तत्वों की व्याख्या की।

मास्लो का ढांचा, यद्यपि मनोविज्ञान पर आधारित है, सार्वजनिक प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन और नेतृत्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि कर्मचारी प्रदर्शन व्यक्तिगत, सामाजिक और पेशेवर आवश्यकताओं की पूर्ति से सीधे संबंधित है।
मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम (Maslow’s Hierarchy of Needs)
मास्लो ने मानव आवश्यकताओं को पदानुक्रम में व्यवस्थित किया, जो प्राथमिक भौतिक आवश्यकताओं से लेकर उच्चतम मनोवैज्ञानिक और आत्म-साक्षात्कार की जरूरतों तक बढ़ता है। इसे आमतौर पर पिरामिड के रूप में दर्शाया जाता है:
- भौतिक आवश्यकताएँ (Physiological Needs)
- जीवन निर्वाह हेतु मूल आवश्यकताएँ: भोजन, पानी, आश्रय, वस्त्र।
- संगठनात्मक संदर्भ में, इसमें पर्याप्त वेतन, सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ और सुरक्षा शामिल हैं।
- सुरक्षा की आवश्यकताएँ (Safety Needs)
- सुरक्षा, स्थिरता और हानि से संरक्षण।
- इसमें नौकरी की सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और मनमाने व्यवहार से संरक्षण शामिल है।
- सामाजिक / अपनापन की आवश्यकताएँ (Social / Belongingness Needs)
- मित्रता, सहभागिता और अंतर-संबंध।
- कर्मचारी मान्यता, समूह में स्वीकृति और सहयोग चाहते हैं।
- स्वाभिमान की आवश्यकताएँ (Esteem Needs)
- आत्म-सम्मान, उपलब्धि, मान्यता और प्रतिष्ठा।
- कार्यस्थल में पदोन्नति, पुरस्कार और सहकर्मियों का सम्मान इन आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकताएँ (Self-Actualization Needs)
- व्यक्तिगत क्षमता की प्राप्ति, रचनात्मकता और आत्म-विकास।
- सीखने, नवाचार और अर्थपूर्ण कार्य के अवसर इस उच्चतम स्तर की पूर्ति करते हैं।
मास्लो ने कहा:
“What a man can be, he must be. This need we may call self-actualization.”
“जो कुछ मनुष्य बन सकता है, उसे बनना चाहिए। इस आवश्यकता को हम आत्म-साक्षात्कार कहते हैं।”
यह दर्शाता है कि प्रेरणा गतिशील है, और जैसे-जैसे निम्न स्तर की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं, व्यक्ति उच्च स्तर की आवश्यकताओं की ओर अग्रसर होता है।
संगठनात्मक व्यवहार पर प्रभाव (Implications for Organizational Behavior)
- कर्मचारी प्रेरणा: प्रबंधकों को यह पहचानना आवश्यक है कि कौन-सी आवश्यकता स्तर कर्मचारी में प्रमुख है और उसी अनुसार रणनीति अपनानी चाहिए।
- कार्यस्थल का डिज़ाइन: ऐसा वातावरण जो भौतिक, सुरक्षा और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करे, सक्रियता और उत्पादकता बढ़ाता है।
- नेतृत्व प्रथाएँ: ऐसे नेता जो स्वाभिमान और आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकताओं को पहचानते और बढ़ावा देते हैं, वफादारी, नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं।
- सार्वजनिक प्रशासन: मानव आवश्यकताओं पर केंद्रित नीतियाँ और प्रशासनिक सुधार दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा को बढ़ाते हैं।
तुलनात्मक दृष्टि (Comparative Perspective)
मास्लो के सिद्धांत अन्य प्रेरणा थ्योरियों के साथ सहायक और तुलनात्मक हैं:
| पहलु | मास्लो | हर्ज़बर्ग | टेलर / वैज्ञानिक प्रबंधन |
|---|---|---|---|
| फोकस | आवश्यकताओं का पदानुक्रम, आंतरिक और बाह्य प्रेरक | नौकरी के कारक और प्रेरक तत्व | कार्य दक्षता, बाहरी प्रोत्साहन |
| प्रेरणा स्रोत | आवश्यकताओं की पूर्ति (मानसिक और शारीरिक) | कार्य डिजाइन और मान्यता | आर्थिक इनाम और पर्यवेक्षण |
| अनुप्रयोग | HRM, नेतृत्व, कर्मचारी संतोष | कार्य समृद्धि, प्रदर्शन | उत्पादकता अनुकूलन |
जहां टेलर और वैज्ञानिक प्रबंधन आर्थिक प्रोत्साहन पर जोर देते हैं, मास्लो कर्मचारी के मनोवैज्ञानिक और विकासात्मक आवश्यकताओं को प्रमुखता देता है।
आलोचना (Criticisms)
- मास्लो का पदानुक्रम सख्त वैज्ञानिक रूप से निश्चित नहीं है; व्यक्ति कई आवश्यकताओं को एक साथ भी पूरा कर सकता है।
- सांस्कृतिक और सामाजिक कारक आवश्यकताओं के क्रम और प्राथमिकता को प्रभावित कर सकते हैं।
- बड़े नौकरशाही संगठनों में उच्च स्तर की आवश्यकताओं की पूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिर भी, मास्लो का सिद्धांत मानव प्रेरणा को समझने के लिए स्थायी और प्रभावशाली ढांचा प्रदान करता है।
समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)
- मानव संसाधन प्रबंधन (HRM): भूमिकाएँ, प्रोत्साहन और नीतियाँ डिजाइन करना जो कर्मचारी की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करें।
- नेतृत्व और संगठनात्मक संस्कृति: नेता स्वाभिमान और आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकताओं को पहचानकर नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
- सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधन: मानव-केंद्रित नीतियाँ दक्षता, संतोष और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ाती हैं।
- कर्मचारी संलग्नता: मान्यता, व्यक्तिगत विकास और सहभागिता संगठनात्मक प्रतिबद्धता को बढ़ाती है।
मास्लो का पदानुक्रम आधुनिक कर्मचारी संलग्नता ढांचे, प्रतिभा प्रबंधन और सहभागी नेतृत्व मॉडल का आधार है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अब्राहम मास्लो ने प्रशासनिक सिद्धांत में यह स्पष्ट किया कि प्रेरणा केवल वित्तीय नहीं है, बल्कि बहु-स्तरीय और बहुआयामी है, जिसमें भौतिक, मनोवैज्ञानिक और आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकताएँ शामिल हैं। मास्लो के सिद्धांत को नेतृत्व, HRM और संगठनात्मक डिजाइन में लागू करके, प्रशासनिक संगठन मानव-केंद्रित, अनुकूल और प्रभावी बन सकते हैं, जहाँ कर्मचारी अपनी सर्वोच्च क्षमता प्राप्त कर सकें।
References / Suggested Readings
- Abraham H. Maslow – Motivation and Personality (1954)
- Abraham H. Maslow – Toward a Psychology of Being (1962)
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
- Prasad & Prasad – Administrative Thinkers
- Stephen P. Robbins – Organizational Behavior
FAQs
Q1. मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम क्या है?
यह मानव प्रेरणा का पाँच-स्तरीय मॉडल है, जो भौतिक आवश्यकताओं से आत्म-साक्षात्कार तक बढ़ता है।
Q2. मास्लो का सिद्धांत सार्वजनिक प्रशासन में कैसे लागू होता है?
विभिन्न स्तर की आवश्यकताओं को पहचानकर, कर्मचारी प्रेरणा, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा बढ़ाई जा सकती है।
Q3. मास्लो के सिद्धांत की सीमाएँ क्या हैं?
पदानुक्रम सख्त नहीं है; सांस्कृतिक और व्यक्तिगत भिन्नताएँ क्रम को बदल सकती हैं, और बड़े संगठन में उच्च स्तर की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।