सामुदायिक और नारीवादी अवधारणाएँ | Michael Walzer, Michael Sandel, Susan Moller Okin
परिचय (Introduction)
समकालीन राजनीतिक सिद्धांत में उदारवाद (liberalism) की व्यापक आलोचना देखने को मिलती है, विशेषकर उसके अमूर्त व्यक्तिवाद (abstract individualism) और सार्वभौमिक न्याय सिद्धांतों को लेकर। इस आलोचना की दो प्रभावशाली धाराएँ हैं—सामुदायिकवाद (communitarianism) और नारीवादी राजनीतिक सिद्धांत (feminist political theory)। सामुदायिक विचारक समुदाय, साझा मूल्यों और सामाजिक प्रथाओं के नैतिक महत्व पर ज़ोर देते हैं, जबकि नारीवादी विचारक लिंग (gender), सत्ता (power) और निजी क्षेत्र (private sphere) की उपेक्षा को उजागर करते हैं।

इस लेख में Michael Walzer, Michael Sandel और Susan Moller Okin के विचारों के माध्यम से सामुदायिक और नारीवादी अवधारणाओं का विश्लेषण किया गया है। ये तीनों विचारक उदार सिद्धांत—विशेषकर Rawlsian liberalism—की आलोचना करते हैं और Debates in Political Theory (DU MA Political Science) में इनका अध्ययन अनिवार्य है।
वैचारिक पृष्ठभूमि : उदारवाद और उसकी आलोचना
उदार राजनीतिक सिद्धांत, खासकर जॉन रॉल्स (John Rawls) के रूप में, न्याय को ऐसे सिद्धांतों के रूप में प्रस्तुत करता है जिन्हें तार्किक और सामाजिक पहचान से विमुक्त (abstracted) व्यक्ति चुनते हैं। उदार ‘स्व’ (self) को स्वायत्त, तर्कसंगत और अपने उद्देश्यों से पूर्व माना जाता है। इसका उद्देश्य निष्पक्षता और सार्वभौमिकता सुनिश्चित करना है।
इसके विपरीत, सामुदायिक और नारीवादी विचारक तर्क देते हैं कि व्यक्ति सामाजिक रूप से अंतर्निहित (socially embedded) होता है। उसकी पहचान, नैतिकता और चुनाव समुदाय, परंपराओं और सत्ता-संबंधों से आकार लेते हैं। इसलिए न्याय और नैतिकता को सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ से अलग करके नहीं समझा जा सकता।
सामुदायिकवाद (Communitarianism) : मूल मान्यताएँ
सामुदायिकवाद कोई एकरूप सिद्धांत नहीं, बल्कि ऐसे तर्कों का समूह है जो उदार व्यक्तिवाद पर संदेह व्यक्त करता है। सामुदायिक विचारकों के अनुसार नैतिक मूल्य और राजनीतिक सिद्धांत साझा परंपराओं और सामाजिक प्रथाओं से उत्पन्न होते हैं, न कि केवल अमूर्त तर्क से।
वे व्यक्तिगत अधिकारों को पूरी तरह अस्वीकार नहीं करते, पर यह ज़ोर देते हैं कि अधिकारों का अर्थ और वैधता समुदाय के नैतिक ढाँचे के भीतर ही समझी जा सकती है। यह दृष्टिकोण न्याय, नागरिकता और लोकतंत्र की बहसों में संदर्भ (context) और सामाजिक अर्थ (social meaning) को केंद्रीय बनाता है।
माइकल वाल्ज़र : सामाजिक अर्थ और न्याय के क्षेत्र (Spheres of Justice)
Michael Walzer सामुदायिक परंपरा के प्रमुख विचारक हैं। अपनी पुस्तक Spheres of Justice में वे तर्क देते हैं कि न्याय का अर्थ है सामाजिक वस्तुओं (social goods) का वितरण उनके सामाजिक अर्थ (social meanings) के अनुसार। समाज में विभिन्न वस्तुएँ—जैसे राजनीतिक सत्ता, शिक्षा, धन—अलग-अलग “क्षेत्रों” (spheres) से संबंधित होती हैं और उनके वितरण के सिद्धांत भी अलग होने चाहिए।
वाल्ज़र एकल सार्वभौमिक सिद्धांत (जैसे समानता या उपयोगिता) को अस्वीकार करते हैं और जटिल समानता (complex equality) का विचार प्रस्तुत करते हैं—अर्थात् एक क्षेत्र में प्रभुत्व दूसरे क्षेत्र में प्रभुत्व में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। उदाहरणतः धन के बल पर राजनीतिक सत्ता नहीं खरीदी जानी चाहिए। यह दृष्टिकोण उदार अमूर्तता के बजाय सांस्कृतिक संदर्भ और सामाजिक अर्थ पर आधारित न्याय को सामने रखता है।
माइकल सैंडल : ‘अबंधित स्व’ (Unencumbered Self) की आलोचना
Michael Sandel उदारवाद की दार्शनिक आलोचना प्रस्तुत करते हैं। Liberalism and the Limits of Justice में वे रॉल्स के उदार स्व की अवधारणा को “अबंधित स्व (unencumbered self)” कहते हैं—एक ऐसा स्व जो सामाजिक भूमिकाओं, परंपराओं और प्रतिबद्धताओं से अलग माना जाता है।
सैंडल के अनुसार व्यक्ति अपने समुदाय, परिवार और परंपराओं से निर्मित होता है। नैतिक तर्क केवल प्रक्रियात्मक (procedural) नहीं हो सकता; उसे साझा मूल्यों को भी स्वीकार करना होगा। इस प्रकार वे right over the good की उदार प्राथमिकता को चुनौती देते हैं और अधिक सार्थक नैतिक राजनीति (substantive moral politics) की मांग करते हैं।
नारीवादी राजनीतिक सिद्धांत : मुख्य सरोकार
नारीवादी राजनीतिक सिद्धांत भी उदार अमूर्त व्यक्तिवाद की आलोचना करता है, लेकिन इसके साथ ही लिंग, सत्ता और पितृसत्ता (patriarchy) पर विशेष ध्यान देता है। नारीवादी विचारकों का तर्क है कि पारंपरिक राजनीतिक सिद्धांतों ने महिलाओं के अनुभवों—विशेषकर परिवार और देखभाल के निजी क्षेत्र—को हाशिये पर रखा है।
नारीवादी दृष्टिकोण public–private divide को चुनौती देता है और यह दिखाता है कि निजी क्षेत्र भी राजनीतिक है। न्याय तब तक अधूरा है जब तक परिवार, विवाह और श्रम-बाज़ार जैसी संस्थाओं में निहित लैंगिक असमानताओं को संबोधित न किया जाए।
सुसान मोलर ओकिन : न्याय, लिंग और परिवार
Susan Moller Okin नारीवादी राजनीतिक सिद्धांत की प्रमुख विचारक हैं। Justice, Gender, and the Family में वे तर्क देती हैं कि यदि न्याय के सिद्धांत परिवार को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो वे मूलतः अपूर्ण हैं। उदार सिद्धांत परिवार को निजी और अपोलिटिकल मान लेते हैं, जिससे घरेलू असमानताएँ छिप जाती हैं।
ओकिन दिखाती हैं कि परिवार के भीतर लैंगिक असमानता शिक्षा, रोज़गार और अवसरों पर गहरा प्रभाव डालती है, जिससे fair equality of opportunity कमजोर होती है। वे उदार समानता और स्वायत्तता को बनाए रखते हुए निजी क्षेत्र को न्याय के दायरे में लाने की वकालत करती हैं—इस तरह वे उदारवाद और नारीवाद के बीच सेतु बनाती हैं।
तुलनात्मक विश्लेषण : सामुदायिक बनाम नारीवादी दृष्टिकोण
यद्यपि सामुदायिक और नारीवादी सिद्धांत उदार अमूर्तता की आलोचना साझा करते हैं, फिर भी उनके ज़ोर अलग हैं। सामुदायिक विचारक साझा मूल्यों और परंपराओं पर ध्यान देते हैं, जबकि नारीवादी विचारक उन परंपराओं की आलोचना करते हैं जो महिलाओं और अन्य हाशिए के समूहों को दबाती हैं।
वाल्ज़र और सैंडल समुदाय और सामाजिक अर्थ पर ज़ोर देते हैं, वहीं ओकिन यह प्रश्न उठाती हैं कि क्या समुदाय स्वयं न्यायपूर्ण है। इस प्रकार नारीवादी दृष्टिकोण सामुदायिकता की संभावित रूढ़िवादिता को चुनौती देता है।
आलोचना और प्रत्यालोचना
सामुदायिकवाद पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह सापेक्षवाद (relativism) को बढ़ावा दे सकता है और परंपरा के नाम पर दमनकारी प्रथाओं को正 ठहरा सकता है। नारीवादी आलोचक कहते हैं कि समुदाय अक्सर महिलाओं के लिए असमान और असुरक्षित होते हैं।
दूसरी ओर, नारीवादी सिद्धांत पर यह आरोप भी लगता है कि वह जिन उदार मूल्यों की आलोचना करता है, उन्हीं पर निर्भर रहता है। ओकिन के समर्थक तर्क देते हैं कि यह आलोचनात्मक संलग्नता (critical engagement) है, न कि पूर्ण अस्वीकृति।
समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)
आज के समय में बहुसांस्कृतिकवाद (multiculturalism), पहचान की राजनीति (identity politics), लैंगिक न्याय और नागरिकता से जुड़े प्रश्नों में ये दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक हैं। सांस्कृतिक अधिकार, परिवार नीति और सामाजिक मान्यता की बहसें इन्हीं सिद्धांतों से प्रेरित हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
सामुदायिक और नारीवादी अवधारणाएँ उदार राजनीतिक सिद्धांत की सीमाओं को उजागर करती हैं। Walzer, Sandel और Okin के विचार यह दिखाते हैं कि न्याय को समुदाय, सामाजिक अर्थ और लैंगिक सत्ता-संबंधों से अलग करके नहीं समझा जा सकता। ये दृष्टिकोण उदारवाद को पूरी तरह खारिज नहीं करते, बल्कि उसे अधिक समावेशी, संदर्भ-संवेदी और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।