जाति और हिंदू सामाजिक व्यवस्था की आलोचना
बी. आर. आंबेडकर के सामाजिक और राजनीतिक दर्शन के केंद्र में जाति की तीव्र आलोचना स्थित है। आंबेडकर के लिए जाति कोई साधारण सामाजिक प्रथा या सांस्कृतिक विशेषता नहीं थी, बल्कि यह सत्ता, वर्चस्व और असमानता की एक सुव्यवस्थित व्यवस्था थी, जो भारतीय समाज के प्रत्येक क्षेत्र—सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक—को प्रभावित करती थी। हिंदू…