विकास के रूप में स्वतंत्रता : अमर्त्य सेन
परिचय (Introduction)
आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत और विकास अध्ययन (development studies) में स्वतंत्रता (freedom) को अब केवल राज्य के हस्तक्षेप की अनुपस्थिति या औपचारिक अधिकारों तक सीमित नहीं माना जाता। इस संदर्भ में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक अमर्त्य सेन (Amartya Sen) ने स्वतंत्रता की एक व्यापक और नवाचारी व्याख्या प्रस्तुत की, जिसे उन्होंने Development as Freedom में “विकास के रूप में स्वतंत्रता” (freedom as development) कहा।

सेन के अनुसार विकास का वास्तविक उद्देश्य आर्थिक वृद्धि (economic growth) नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक स्वतंत्रताओं (real freedoms) का विस्तार है। यदि व्यक्ति भूख, अशिक्षा, बीमारी और राजनीतिक दमन से घिरा हुआ है, तो केवल आय में वृद्धि उसे वास्तव में स्वतंत्र नहीं बनाती। यह दृष्टिकोण पारंपरिक विकास सिद्धांतों को चुनौती देता है और MA Political Science (DU) के पाठ्यक्रम में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वतंत्रता और विकास को नैतिक तथा राजनीतिक रूप से जोड़ता है।
विकास और स्वतंत्रता : सैद्धांतिक पृष्ठभूमि
पारंपरिक विकास सिद्धांतों में विकास को अक्सर GDP, राष्ट्रीय आय या औद्योगीकरण के माध्यम से मापा गया। इन दृष्टिकोणों में यह मान लिया गया कि आर्थिक समृद्धि अपने आप सामाजिक और राजनीतिक प्रगति को जन्म देगी। अमर्त्य सेन ने इस धारणा की आलोचना की और यह दिखाया कि कई देश आर्थिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद व्यापक गरीबी, असमानता और राजनीतिक दमन से ग्रस्त हैं।
सेन का तर्क है कि विकास को साधनों (means) के बजाय उद्देश्यों (ends) के आधार पर मापा जाना चाहिए। उनके अनुसार स्वतंत्रता केवल विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि वही विकास की बुनियाद है। यह विचार उदार राजनीतिक सिद्धांत और कल्याण अर्थशास्त्र दोनों से जुड़ा हुआ है और स्वतंत्रता को मानव गरिमा (human dignity) और एजेंसी (agency) से जोड़ता है, जैसा कि Stanford Encyclopedia of Philosophy में capability approach की चर्चा में स्पष्ट किया गया है।
क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach)
अमर्त्य सेन के सिद्धांत का केंद्रीय तत्व क्षमता दृष्टिकोण (capability approach) है। इस दृष्टिकोण के अनुसार विकास का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि लोग वास्तव में क्या करने और क्या बनने में सक्षम हैं, न कि केवल उनके पास कितने संसाधन हैं।
सेन कार्य-स्थितियों (functionings) और क्षमताओं (capabilities) के बीच अंतर करते हैं। कार्य-स्थितियाँ वे उपलब्धियाँ हैं जो व्यक्ति प्राप्त करता है, जैसे स्वस्थ होना, शिक्षित होना या राजनीतिक भागीदारी करना। क्षमताएँ उन वास्तविक अवसरों को दर्शाती हैं जिनके माध्यम से व्यक्ति इन उपलब्धियों को प्राप्त कर सकता है।
सेन यह स्पष्ट करते हैं कि समान आय होने के बावजूद दो व्यक्तियों की क्षमताएँ भिन्न हो सकती हैं, क्योंकि लिंग, सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य और राजनीतिक परिस्थितियाँ स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि वे संसाधन-आधारित और उपयोगिता-आधारित (utilitarian) दृष्टिकोणों को अपर्याप्त मानते हैं, जैसा कि उन्होंने Inequality Reexamined में विस्तार से बताया है।
स्वतंत्रता की साधनात्मक और संरचनात्मक भूमिका
अमर्त्य सेन स्वतंत्रता की संरचनात्मक (constitutive) और साधनात्मक (instrumental) भूमिकाओं के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं। संरचनात्मक रूप से स्वतंत्रता स्वयं में मूल्यवान है, क्योंकि चुनाव और निर्णय लेने की क्षमता मानव गरिमा का अभिन्न अंग है।
साधनात्मक रूप से स्वतंत्रता विकास को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। सेन पाँच प्रमुख साधनात्मक स्वतंत्रताओं की पहचान करते हैं—राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक सुविधाएँ, सामाजिक अवसर, पारदर्शिता की गारंटी और संरक्षणात्मक सुरक्षा। ये सभी स्वतंत्रताएँ एक-दूसरे को मज़बूत करती हैं और विकास की प्रक्रिया को गतिशील बनाती हैं।
राजनीतिक स्वतंत्रता, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और चुनाव, शासन को जवाबदेह बनाती है। सेन का प्रसिद्ध तर्क है कि किसी भी कार्यशील लोकतंत्र में अकाल नहीं पड़ा है, क्योंकि स्वतंत्र प्रेस और सार्वजनिक विमर्श सरकार को समय पर हस्तक्षेप के लिए बाध्य करते हैं, जैसा कि Development as Freedom में उनके अनुभवजन्य विश्लेषण से स्पष्ट होता है।
स्वतंत्रता, लोकतंत्र और सार्वजनिक तर्क (Public Reasoning)
सेन लोकतंत्र को केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं मानते, बल्कि उसे सार्वजनिक तर्क (public reasoning) का मंच मानते हैं। उनके अनुसार लोकतांत्रिक संस्थाएँ नागरिकों को नीतियों पर बहस करने, अन्याय को उजागर करने और सामूहिक निर्णयों में भाग लेने का अवसर देती हैं।
लोकतंत्र की यह भागीदारीपूर्ण अवधारणा स्वतंत्रता को वास्तविक बनाती है, क्योंकि व्यक्ति न केवल निर्णयों का लाभ उठाता है, बल्कि उनके निर्माण में भी भागीदार होता है। इस दृष्टिकोण में स्वतंत्रता और लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि अलग-अलग मूल्य।
विकास के रूप में स्वतंत्रता बनाम पारंपरिक उदार स्वतंत्रता
अमर्त्य सेन की स्वतंत्रता की अवधारणा पारंपरिक उदार सिद्धांतों से भिन्न है, जो स्वतंत्रता को मुख्यतः गैर-हस्तक्षेप (non-interference) के रूप में देखते हैं। सेन इस बात से सहमत हैं कि राज्य का अत्यधिक हस्तक्षेप स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है, लेकिन वे यह भी तर्क देते हैं कि बिना शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा के स्वतंत्रता अर्थहीन हो जाती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सेन सकारात्मक स्वतंत्रता के उस रूप से भी दूरी बनाए रखते हैं, जिसमें राज्य व्यक्ति के “हित” को परिभाषित करता है। उनका दृष्टिकोण पितृसत्तात्मक (paternalistic) नहीं है, बल्कि व्यक्ति की पसंद और निर्णय की क्षमता को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इस कारण उनका सिद्धांत उदारवाद और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करता है।
आलोचना और प्रत्यालोचना
अमर्त्य सेन के सिद्धांत की एक प्रमुख आलोचना यह है कि उन्होंने क्षमताओं की कोई निश्चित सूची प्रस्तुत नहीं की। कुछ विद्वानों का तर्क है कि इससे नीति-निर्माण में अस्पष्टता उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त, यह भी कहा गया है कि क्षमता दृष्टिकोण अत्यधिक व्यक्तिवादी है और संरचनात्मक सत्ता संबंधों को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
इन आलोचनाओं के उत्तर में सेन का तर्क है कि क्षमताओं की सूची को दार्शनिकों द्वारा निर्धारित करने के बजाय लोकतांत्रिक विमर्श के माध्यम से तय किया जाना चाहिए। उनके अनुसार यही प्रक्रिया स्वतंत्रता का वास्तविक अभ्यास है। यह दृष्टिकोण बाद में मार्था नुसबाम द्वारा विकसित किए गए capability framework से संवाद करता है।
समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)
आज के समय में गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़े वैश्विक विमर्श में अमर्त्य सेन का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक है। Human Development Index (HDI) और संयुक्त राष्ट्र की विकास नीतियाँ स्पष्ट रूप से इस विचार से प्रभावित हैं कि विकास को मानव स्वतंत्रताओं के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक सिद्धांत में सेन का कार्य स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के बीच की खाई को पाटता है और सिद्धांत तथा व्यवहार के बीच सेतु का कार्य करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अमर्त्य सेन की विकास के रूप में स्वतंत्रता की अवधारणा स्वतंत्रता और विकास की समझ में एक मौलिक परिवर्तन प्रस्तुत करती है। विकास को केवल आर्थिक वृद्धि के बजाय मानव स्वतंत्रताओं के विस्तार के रूप में परिभाषित करके सेन राजनीतिक सिद्धांत को एक नैतिक और व्यावहारिक दिशा प्रदान करते हैं। MA Political Science के छात्रों के लिए यह सिद्धांत आधुनिक राजनीतिक विचार का एक अनिवार्य स्तंभ है।