भारत और इज़राइल: बहु-जातीय / बहुसांस्कृतिक समाज
(India and Israel as Multi-Ethnic / Multicultural Societies)
बहु-जातीय और बहुसांस्कृतिक समाज वे होते हैं जहाँ जातीयता, धर्म, भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक अनुभवों पर आधारित स्थायी विविधता सामाजिक जीवन और राजनीति की बुनियादी विशेषता बन जाती है। तुलनात्मक राजनीति में ऐसे समाजों का अध्ययन केवल जनसांख्यिकीय विविधता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी देखता है कि राज्य पहचान को कैसे मान्यता देता है, विनियमित करता है, समायोजित करता है या किसी एक पहचान को विशेषाधिकार देता है।
इस दृष्टि से India और Israel दोनों ही बहु-जातीय समाजों के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं, किंतु उनकी बहुसांस्कृतिक व्यवस्थाएँ इतिहास, राष्ट्र-निर्माण, संवैधानिक ढाँचे और राजनीतिक संघर्षों के कारण भिन्न रूप लेती हैं।
यह इकाई भारत और इज़राइल को बहु-जातीय/बहुसांस्कृतिक समाजों के रूप में विश्लेषित करती है—विविधता की संरचना, राज्य की प्रतिक्रियाएँ और लोकतंत्र व नागरिकता पर उनके प्रभावों के संदर्भ में।
बहु-जातीयता और बहुसांस्कृतिकता: एक वैचारिक भेद
बहु-जातीयता (Multi-ethnicity) समाज की एक सामाजिक स्थिति है, जहाँ अलग-अलग समूह समय के साथ अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हैं। इसके विपरीत, बहुसांस्कृतिकता (Multiculturalism) उस स्थिति के प्रति राज्य और राजनीति की मानकात्मक-संस्थागत प्रतिक्रिया को दर्शाती है।
अर्थात् बहु-जातीयता एक तथ्य है, जबकि बहुसांस्कृतिकता एक राजनीतिक परियोजना।
तुलनात्मक प्रश्न यह नहीं है कि भारत और इज़राइल विविध हैं या नहीं—वे दोनों हैं—बल्कि यह है कि विविधता को कैसे संगठित, राजनीतिकृत और संस्थागत किया गया है।
भारत: गहन विविधता और सभ्यतागत बहुलता
भारत आधुनिक विश्व के सबसे जटिल बहु-जातीय समाजों में से एक है। इसकी विविधता कई स्तरों पर कार्य करती है—
- धार्मिक: हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन आदि
- भाषायी: विभिन्न भाषायी परिवारों से जुड़ी सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ
- जातीय व क्षेत्रीय: जनजातीय समुदाय, क्षेत्रीय संस्कृतियाँ और उप-राष्ट्रीय पहचानें
- जाति: एक विशिष्ट और गहरी सामाजिक संरचना, जो दैनिक जीवन को प्रभावित करती है
यह विविधता आधुनिक प्रवासन का परिणाम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ऐतिहासिक प्रक्रियाओं—सह-अस्तित्व, संवाद, संघर्ष और समायोजन—से निर्मित है। भारतीय समाज एक सभ्यतागत बहुलता के रूप में विकसित हुआ, जहाँ भिन्नता आधुनिक राष्ट्र-राज्य से बहुत पहले सामान्यीकृत थी।
भारत में संवैधानिक बहुसांस्कृतिकता
स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्य ने विविधता के प्रबंधन के लिए एक सचेत राजनीतिक ढाँचा अपनाया। संविधान ने बहुलता को संस्थागत करने हेतु—
- धर्मनिरपेक्षता (धर्मों के प्रति राज्य की तटस्थता)
- संघवाद (भाषायी-क्षेत्रीय विविधता की मान्यता)
- अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक व शैक्षिक अधिकार
- सकारात्मक भेदभाव (आरक्षण)
जैसे प्रावधान किए।
इस प्रकार भारत की बहुसांस्कृतिकता संवैधानिक और समावेशी है—विविधता को साझा राजनीतिक ढाँचे में शामिल करने का प्रयास।
फिर भी यह मॉडल विवादित रहा है। राष्ट्रीय पहचान, बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक संबंध और सांस्कृतिक समरूपीकरण की बहसें बताती हैं कि भारत में बहुसांस्कृतिक सह-अस्तित्व निरंतर मोलभाव और संघर्ष का परिणाम है।
इज़राइल: जातीय-राष्ट्रीय ढाँचे के भीतर विविधता
इज़राइल भी गहराई से बहु-जातीय समाज है, पर उसकी संरचना भिन्न है। यहाँ विविधता दो स्तरों पर दिखाई देती है—
- यहूदी समुदाय के भीतर आंतरिक विविधता—यूरोप, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया से आए समूह, जिनकी सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराएँ अलग हैं।
- एक महत्त्वपूर्ण गैर-यहूदी अरब-फ़िलिस्तीनी अल्पसंख्यक, जिसकी भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान प्रमुख ज़ायोनिस्ट कथा से भिन्न है।
भारत के विपरीत, इज़राइल स्वयं को स्पष्ट रूप से एक यहूदी राज्य के रूप में परिभाषित करता है—यह परिभाषा ज़ायोनिस्ट विचारधारा और ऐतिहासिक उत्पीड़न-विस्थापन के अनुभव से जुड़ी है।
जातीय लोकतंत्र और भेदित नागरिकता
अनेक विद्वान इज़राइल को जातीय लोकतंत्र (ethnic democracy) का उदाहरण मानते हैं—जहाँ लोकतांत्रिक संस्थाएँ मौजूद रहती हैं, पर एक प्रमुख जातीय-राष्ट्रीय समूह को विशेषाधिकार मिलता है। औपचारिक राजनीतिक अधिकारों के बावजूद, सत्ता, संसाधनों और प्रतीकात्मक मान्यता तक पहुँच समान नहीं रहती।
इज़राइल में बहुसांस्कृतिकता सीमित और श्रेणीबद्ध है। विविधता को स्वीकार किया जाता है, किंतु राज्य की पहचान, प्रतीक और आव्रजन नीतियाँ यहूदी राष्ट्रत्व को प्राथमिकता देती हैं। इससे लोकतांत्रिक समानता और जातीय-राष्ट्रीय वरीयता के बीच स्थायी तनाव उत्पन्न होता है—विशेषकर गैर-यहूदी नागरिकों के लिए।
विविधता की राजनीतिक अभिव्यक्ति
दोनों देशों में बहु-जातीयता राजनीति को गहराई से आकार देती है।
भारत में—
- क्षेत्रीय और पहचान-आधारित दल
- गठबंधन सरकारें
- संघीय सौदेबाज़ी और समायोजन
इज़राइल में—
- अत्यधिक खंडित दल-प्रणाली
- बार-बार बनने वाली गठबंधन सरकारें
- धर्म, सुरक्षा और नागरिकता पर तीव्र बहसें
अंतर यह है कि भारत में बहुलता का प्रबंधन समायोजन के माध्यम से एकता पर बल देता है, जबकि इज़राइल में एक प्रधान जातीय-राष्ट्रीय पहचान के भीतर एकता पर।
बहुसांस्कृतिकता, संघर्ष और असमानता
बहु-जातीय समाजों में असमान शक्ति-संबंध अक्सर तनाव पैदा करते हैं। भारत में जाति-आधारित असमानताएँ, सांप्रदायिक संघर्ष और क्षेत्रीय विषमताएँ बहुसांस्कृतिक शासन को जटिल बनाती हैं। इज़राइल में जातीय स्तरीकरण और राष्ट्रीय संघर्ष समावेशन-बहिष्करण की बहस को तीव्र करते हैं।
इसलिए बहुसांस्कृतिकता केवल विविधता का उत्सव नहीं, बल्कि संरचनात्मक असमानताओं से निपटने की राजनीतिक चुनौती है।
तुलनात्मक आकलन
तुलना से कुछ स्पष्ट बिंदु उभरते हैं—
- भारत विविधता को राष्ट्रत्व की आधारशिला मानता है; इज़राइल इसे प्रधान जातीय-राष्ट्रीय पहचान के अधीन रखता है।
- भारत की बहुसांस्कृतिकता संवैधानिक रूप से व्यापक है; इज़राइल की राजनीतिक रूप से सीमित।
- भारत लोकतांत्रिक बहुलता पर ज़ोर देता है; इज़राइल लोकतंत्र और जातीय राष्ट्रत्व के बीच संतुलन साधता है।
यह दिखाता है कि बहुसांस्कृतिकता कोई एकरूप मॉडल नहीं, बल्कि संदर्भ-निर्भर राजनीतिक परियोजना है।
निष्कर्ष: बहु-जातीयता और अपनत्व की राजनीति
भारत और इज़राइल बहु-जातीय विविधता के प्रबंधन के दो अलग-अलग मार्ग प्रस्तुत करते हैं। दोनों यह सिद्ध करते हैं कि विविधता लोकतंत्र के साथ असंगत नहीं है; पर उसका राजनीतिक प्रबंधन नागरिकता, समानता और समावेशन की गुणवत्ता तय करता है।
भारत का अनुभव संवैधानिक बहुलता की संभावनाएँ और सीमाएँ दिखाता है, जबकि इज़राइल का अनुभव यह दर्शाता है कि जब बहुसांस्कृतिक यथार्थ एक स्पष्ट जातीय-राष्ट्रीय राज्य-परिभाषा के भीतर काम करता है, तो किस प्रकार के तनाव उत्पन्न होते हैं।
इन मॉडलों की समझ बहुसांस्कृतिक लोकतंत्रों में पहचान, सत्ता और अपनत्व (belonging) की राजनीति के विश्लेषण के लिए अनिवार्य है।
संदर्भ (References)
- Kymlicka, Will. Multicultural Citizenship
- Khilnani, Sunil. The Idea of India
- Bhargava, Rajeev. Seccularism and Its Critics
- Smooha, Sammy. “Ethnic Democracy: Israel as an Archetype”
- Parekh, Bhikhu. Rethinking Multiculturalism