निर्णय-निर्माण (Decision-Making): हर्बर्ट साइमन
भूमिका (Introduction)
निर्णय-निर्माण प्रशासनिक सिद्धांत का मुख्य तत्व है, क्योंकि संगठनिक उद्देश्य प्राप्त करने के लिए विकल्पों में चयन करना इसकी मूल प्रक्रिया है। हर्बर्ट ए. साइमन (1916–2001) ने प्रशासनिक क्रिया की समझ में क्रांति ला दी, यह बताते हुए कि निर्णय-निर्माण ही संगठन के विश्लेषण का केंद्रीय घटक है।

साइमन ने यह स्पष्ट किया कि केवल संरचना, पदानुक्रम या नियमों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; प्रशासनिक दक्षता और प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि निर्णय कितने सही और समय पर लिए जा रहे हैं। उनके विचार आधुनिक सार्वजनिक प्रशासन, संगठनात्मक व्यवहार और नीति विश्लेषण का आधार बने।
साइमन का दृष्टिकोण प्रशासनिक सिद्धांत और व्यवहारिक संगठन के बीच का पुल है, जिसमें संज्ञानात्मक सीमाएँ, सूचना प्रसंस्करण और सीमित तर्कसंगतता (Bounded Rationality) को निर्णय-निर्माण में बाधा माना गया।
साइमन का निर्णय-निर्माण सिद्धांत
साइमन ने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य मानव निर्णय-निर्माण को सुविधाजनक बनाना है। उन्होंने निर्णयों को दो प्रकारों में विभाजित किया:
- Programmed Decisions (प्रोग्राम्ड निर्णय): नियमित और दोहराव वाले, SOP (Standard Operating Procedure) के अनुसार। कम विवेक की आवश्यकता।
- Non-Programmed Decisions (गैर-प्रोग्राम्ड निर्णय): अनोखे, जटिल और नई समस्याएँ, जिनके लिए रचनात्मकता और विश्लेषण आवश्यक।
साइमन ने निर्णय-निर्माण को तीन चरणों में समझाया:
- Intelligence Phase (सूचना/बोध चरण): समस्या की पहचान और उसका विश्लेषण।
- Design Phase (रूपरेखा/डिज़ाइन चरण): विकल्पों और संभावित समाधानों का विकास।
- Choice Phase (निर्णय चरण): सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन।
साइमन ने कहा:
“Decision-making is the heart of administration; it is the core process through which organizations achieve objectives.”
इस ढांचे ने प्रशासनिक सिद्धांत का ध्यान सांकेतिक ढांचे से प्रक्रियात्मक और समस्या-समाधान आधारित दृष्टिकोण की ओर मोड़ दिया।
सीमित तर्कसंगतता (Bounded Rationality)
साइमन ने पूर्ण तर्कसंगतता (Perfect Rationality) के क्लासिकल दृष्टिकोण को चुनौती दी। उन्होंने Bounded Rationality का सिद्धांत पेश किया:
- निर्णयकर्ता मानसिक सीमाओं और पूर्ण जानकारी की कमी के कारण सभी विकल्पों का विश्लेषण नहीं कर सकते।
- समय और संसाधन की सीमाएँ निर्णय को प्रभावित करती हैं।
- व्यक्ति संतोषजनक समाधान (Satisfice) चुनते हैं, न कि सबसे आदर्श विकल्प।
इसका अर्थ है कि प्रशासनिक निर्णय व्यवहारिक और संदर्भ-निर्भर होते हैं, केवल सैद्धांतिक तर्क पर नहीं।
प्रशासनिक व्यवहार (Administrative Behavior)
साइमन की प्रमुख कृति Administrative Behavior (1947) में उन्होंने कहा:
- निर्णय-निर्माण ही प्रशासनिक गतिविधि का केंद्र है।
- संगठन की संरचना का उद्देश्य सूचना को व्यवस्थित करना और जटिलता को कम करना है, ताकि बेहतर निर्णय लिए जा सकें।
- पदानुक्रम, अधिकार और संचार चैनल निर्णय-निर्माण को समर्थन देने के लिए बनाए जाते हैं, न कि केवल सत्ता के लिए।
साइमन ने संगठनात्मक सीखने और फीडबैक पर भी जोर दिया। ऐसे संगठन जो नई जानकारी को इकट्ठा करके सीखते हैं, वे अधिक प्रभावी और कुशल निर्णय ले सकते हैं।
तुलनात्मक दृष्टि
साइमन के निर्णय-निर्माण सिद्धांत की तुलना क्लासिकल विद्वानों (Taylor और Fayol) से की जा सकती है:
| पहलु | हर्बर्ट साइमन | क्लासिकल थ्योरिस्ट (Taylor & Fayol) |
|---|---|---|
| फोकस | निर्णय-निर्माण को प्रशासन का केंद्र मानना | दक्षता, मानकीकरण, प्रबंधकीय कार्य |
| दृष्टिकोण | प्रक्रिया-केंद्रित, संज्ञानात्मक | संरचनात्मक, पदानुक्रमित और नियम-केंद्रित |
| मानव दृष्टिकोण | सीमित तर्कसंगतता, संतोषजनक समाधान | यांत्रिक, पूर्ण तर्कसंगत कार्यकर्ता |
| योगदान | प्रशासनिक व्यवहार और संगठनात्मक सीखना | कार्य अनुकूलन, प्रबंधन सिद्धांत |
जहां क्लासिकल थ्योरिस्ट संरचना और नियमों पर जोर देते थे, साइमन ने संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं, मानव सीमाओं और निर्णय की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया।
आलोचना
- Bounded Rationality मॉडल संगठनात्मक राजनीति और संघर्ष पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता।
- मॉडल सांस्कृतिक भिन्नताओं और वैश्विक प्रशासनिक विविधताओं को पूरी तरह नहीं पकड़ता।
- कुछ आलोचक कहते हैं कि यह निर्णय प्रक्रिया पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जबकि बाहरी कारकों का प्रभाव कम माना गया।
फिर भी, साइमन का योगदान सार्वजनिक प्रशासन, संगठनात्मक सिद्धांत और नीति विश्लेषण में मौलिक और अत्यंत प्रभावशाली है।
समकालीन प्रासंगिकता
साइमन का मॉडल आज भी प्रभावी है:
- सार्वजनिक प्रशासन: साक्ष्य-आधारित नीति और संरचित निर्णय प्रक्रिया।
- प्रबंधन और संगठन अध्ययन: संज्ञानात्मक सीमाएँ और प्रक्रियागत ढाँचा।
- सूचना प्रणाली: जटिल निर्णयों के लिए डिज़ाइन और समर्थन उपकरण।
आधुनिक प्रशासन में व्यवहारिक अंतर्दृष्टि, कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग और सहभागी निर्णय प्रक्रिया साइमन के विचारों का विस्तार हैं।
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निष्कर्ष
हर्बर्ट साइमन ने प्रशासनिक सिद्धांत को इस तरह परिभाषित किया कि निर्णय-निर्माण संगठन का केंद्रीय तत्व है। उनके Bounded Rationality, Programmed vs Non-Programmed Decisions और Administrative Behavior के विचार संगठनात्मक गतिशीलता को समझने में सहायक हैं। साइमन ने ध्यान केंद्रित किया कि निर्धारित संरचना से अधिक मानव संज्ञान और समस्या-समाधान प्रक्रियाएँ संगठन की सफलता निर्धारित करती हैं।
References / Suggested Readings
- Herbert A. Simon – Administrative Behavior (1947)
- Herbert A. Simon – Models of Bounded Rationality (1957)
- James G. March – A Behavioral Theory of the Firm
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
- Prasad & Prasad – Administrative Thinkers
FAQs
Q1. सार्वजनिक प्रशासन में निर्णय-निर्माण क्या है?
निर्णय-निर्माण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से संगठन विकल्पों में चयन करके अपने उद्देश्यों को प्राप्त करता है।
Q2. प्रोग्राम्ड और गैर-प्रोग्राम्ड निर्णय में अंतर क्या है?
प्रोग्राम्ड निर्णय नियमित और नियमों से नियंत्रित होते हैं; गैर-प्रोग्राम्ड निर्णय अनोखे और जटिल होते हैं, जिनमें विवेक और विश्लेषण आवश्यक होता है।
Q3. सीमित तर्कसंगतता (Bounded Rationality) क्या है?
साइमन का विचार है कि मानव संज्ञानात्मक सीमाएँ, समय और सूचना की सीमाएँ निर्णय को आदर्श बनाने से रोकती हैं, इसलिए व्यक्ति संतोषजनक समाधान चुनते हैं।