Similar Posts

  • |

    जेंडर और ‘क्रिटिकल टर्न’: अंतरराष्ट्रीय संबंध कहाँ समझता है

    जेंडर और ‘क्रिटिकल टर्न’: अंतरराष्ट्रीय संबंध कहाँ समझता है (Gender and the ‘Critical Turn’: Where IR Does Understand) अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) में आया ‘क्रिटिकल टर्न’ परंपरागत, प्रत्यक्षवादी (positivist), राज्य-केंद्रित और समस्या-समाधान उन्मुख दृष्टिकोणों से एक महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाता है। नारीवाद, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर–औपनिवेशिक सिद्धांत, मार्क्सवाद और क्रिटिकल सिक्योरिटी स्टडीज़ जैसी आलोचनात्मक धाराएँ IR की उन…

  • |

    धर्म का दर्शन

    बी. आर. आंबेडकर के बौद्धिक चिंतन में धर्म का दर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पारंपरिक धार्मिक दार्शनिकों के विपरीत, जो ईश्वर, आत्मा या मोक्ष जैसे आध्यात्मिक प्रश्नों पर केंद्रित रहते हैं, आंबेडकर ने धर्म को मुख्यतः एक सामाजिक और नैतिक संस्था के रूप में समझा। उनके लिए धर्म का मूल प्रश्न यह नहीं था…

  • |

    पूँजीवादी राज्य

    (Capitalist State) पूँजीवादी राज्य की अवधारणा आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत और तुलनात्मक राजनीति में एक केंद्रीय स्थान रखती है। उदारवादी सिद्धांत जहाँ राज्य को समाज से ऊपर खड़ा एक तटस्थ मध्यस्थ मानते हैं, वहीं आलोचनात्मक और मार्क्सवादी दृष्टिकोण यह तर्क देते हैं कि आधुनिक राज्य पूँजीवादी सामाजिक संबंधों में गहराई से निहित है। राज्य केवल अर्थव्यवस्था…

  • |

    कश्मीरी पंडितों का पलायन

    कश्मीरी पंडितों का पलायन जम्मू और कश्मीर के समकालीन इतिहास की सबसे दर्दनाक और विवादास्पद घटनाओं में से एक है। यह केवल लोगों का भौगोलिक विस्थापन नहीं था, बल्कि एक ऐसा सामाजिक विघटन था जिसने कश्मीर की जनसांख्यिकी, सांस्कृतिक बहुलता और राजनीतिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया।इस पलायन को समझने के लिए इसे आतंकवाद,…

  • |

    निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन

    निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation of Constituencies) लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की एक केंद्रीय प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन स्थापित करना होता है। लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुसार परिसीमन का लक्ष्य “एक व्यक्ति, एक मत, एक मूल्य” के सिद्धांत को सुनिश्चित करना है।परंतु जम्मू और कश्मीर के संदर्भ में परिसीमन कभी भी केवल…

  • |

    चुनावों का प्रशासन (Administration of Elections)

    चुनावों का प्रशासन उस समग्र संस्थागत, कानूनी और कार्यात्मक व्यवस्था को दर्शाता है, जिसके माध्यम से चुनावों की योजना बनाई जाती है, उन्हें संपन्न कराया जाता है और उनके परिणाम घोषित किए जाते हैं। भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण और जनसंख्या-प्रधान लोकतंत्र में चुनावों का प्रशासन केवल एक नियमित नौकरशाही प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक…