वैज्ञानिक प्रबंधन: टेलर और फैयोल
भूमिका (Introduction)
वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific Management), जिसे Taylorism भी कहा जाता है, संगठनात्मक दक्षता को सिस्टमेटिक और वैज्ञानिक तरीकों से बढ़ाने का पहला गंभीर प्रयास माना जाता है। 19वीं और 20वीं सदी के उत्तरार्ध में यह प्रणाली उभरी, जिसका उद्देश्य श्रमिकों और प्रबंधन के बीच कार्यप्रणाली को वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार व्यवस्थित करना था।

फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर ने इसका आधार तैयार किया, जबकि हेनरी फैयोल ने प्रबंधकीय और संगठनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। टेलर और फैयोल दोनों ने आधुनिक प्रशासनिक विचारधारा की नींव रखी, जिसमें ऑपरेशनल दक्षता और प्रबंधकीय विज्ञान का संतुलन शामिल है।
वैज्ञानिक प्रबंधन उस समय की औद्योगिक युग की यांत्रिक और तर्कवादी सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें पारंपरिक शिल्प-कौशल या अनुभवजन्य पद्धतियों की तुलना में मानकीकरण, मापन और समन्वय को महत्व दिया गया।
फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर: वैज्ञानिक प्रबंधन के सिद्धांत
फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर (1856–1915) को वैज्ञानिक प्रबंधन का पिता माना जाता है। टेलर का ध्यान व्यक्तिगत श्रमिकों के प्रदर्शन को अधिकतम करने पर था। उनके मुख्य योगदान इस प्रकार हैं:
- समय और गति अध्ययन (Time and Motion Studies): टेलर ने प्रत्येक कार्य की विश्लेषणात्मक जांच की ताकि अनावश्यक क्रियाओं को समाप्त किया जा सके।
- उपकरण और कार्य पद्धति का मानकीकरण: कार्य उपकरण और प्रक्रियाओं को समान किया गया ताकि दक्षता सुनिश्चित हो।
- वैज्ञानिक चयन और प्रशिक्षण: श्रमिकों को उनकी क्षमता के अनुसार चुना और विशिष्ट कार्य के लिए प्रशिक्षित किया।
- प्रोत्साहन प्रणाली (Incentive Systems): उच्च उत्पादकता वाले श्रमिकों को वित्तीय पुरस्कार देने की प्रणाली।
- योजना और क्रियान्वयन का विभाजन: प्रबंधन योजना बनाए, जबकि कार्य निष्पादन श्रमिकों की जिम्मेदारी था।
टेलर ने कहा:
“In the past the man has been first; in the future the system must be first.”
इसका अर्थ है कि प्रणाली और प्रक्रिया को व्यक्तिगत विवेक से ऊपर रखा जाना चाहिए।
हालाँकि टेलर का कार्य औद्योगिक दक्षता में क्रांति लेकर आया, इसे मानव पक्ष को उपेक्षित करने और श्रमिकों को यांत्रिक इकाई की तरह देखने के लिए आलोचना भी मिली।
हेनरी फैयोल: प्रशासनिक सिद्धांत
हेनरी फैयोल (1841–1925), एक फ्रांसीसी उद्योगपति और विचारक, ने प्रबंधकीय और संगठनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जो टेलर के कार्यस्थल-केंद्रित फोकस का पूरक है। फैयोल ने कहा कि प्रबंधन सभी संगठनों में लागू होने वाला सार्वभौमिक कार्य है, न कि केवल कारखानों तक सीमित।
फैयोल ने प्रबंधन के 14 सिद्धांत प्रस्तुत किए, जिनमें प्रमुख हैं:
- कार्य विभाजन (Division of Work): विशेषज्ञता दक्षता बढ़ाती है।
- अधिकार और जिम्मेदारी (Authority & Responsibility): प्रबंधकों को आदेश देने और परिणाम के लिए जिम्मेदार होना चाहिए।
- अनुशासन (Discipline): नियमों का पालन संगठन में व्यवस्था बनाए रखता है।
- एकता आदेश (Unity of Command): कर्मचारी केवल एक वरिष्ठ से निर्देश प्राप्त करें।
- एकता निर्देशन (Unity of Direction): संगठन की सभी गतिविधियाँ एक योजना के तहत समन्वित हों।
- व्यक्तिगत हित का अधीनता (Subordination of Individual Interest): संगठन के हित व्यक्तिगत हित से ऊपर।
- मुआवजा (Remuneration): उचित वेतन प्रदर्शन को प्रोत्साहित करता है।
- केन्द्रीयकरण/विकेंद्रीकरण (Centralization vs Decentralization): निर्णय लेने में संतुलन।
- स्केलर चेन (Scalar Chain): स्पष्ट पदानुक्रम संचार में सुधार करता है।
- व्यवस्था (Order): सामग्री और कर्मियों का उचित क्रम।
- समानता (Equity): निष्पक्षता और न्याय प्रेरणा देते हैं।
- कार्यस्थायित्व (Stability of Tenure): कर्मचारी स्थायित्व दक्षता बढ़ाता है।
- पहल (Initiative): प्रबंधकीय सीमाओं के भीतर रचनात्मकता को बढ़ावा।
- संगठनात्मक भावना (Esprit de Corps): टीमवर्क और सामंजस्य।
फैयोल के शब्दों में:
“To manage is to forecast and plan, to organize, to command, to coordinate and to control.”
तुलना: टेलर बनाम फैयोल
| पहलु | फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर | हेनरी फैयोल |
|---|---|---|
| फोकस | कार्यस्थल दक्षता, श्रमिक और कार्य | प्रबंधकीय कार्य और संगठनात्मक सिद्धांत |
| दृष्टिकोण | वैज्ञानिक, मात्रात्मक | प्रशासनिक, कार्यात्मक |
| स्तर | सूक्ष्म (individual worker & task) | व्यापक (management & organization) |
| मुख्य सिद्धांत | समय-गति अध्ययन, मानकीकरण, विशेषज्ञता | योजना, संगठन, आदेश, समन्वय, नियंत्रण |
| आलोचना | यांत्रिक, सामाजिक पहलू नजरअंदाज | सैद्धांतिक, व्यवहार में कम विवरण |
संक्षेप में, टेलर और फैयोल मिलकर कार्य दक्षता और प्रबंधकीय समन्वय का पूरा ढांचा प्रस्तुत करते हैं।
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आलोचना
- दक्षता पर अत्यधिक जोर: श्रमिकों की सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों की अनदेखी।
- यांत्रिक दृष्टिकोण: श्रमिकों को मशीन के भाग के रूप में देखना।
- सीमित लागू करने की क्षमता: रचनात्मक और ज्ञान-आधारित कार्यों में कठिनाई।
- प्रेरणा की उपेक्षा: केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं।
- सख्ती/कठोरता: अत्यधिक मानकीकरण नवाचार को रोक सकता है।
फिर भी, वैज्ञानिक प्रबंधन आधुनिक प्रबंधन, संचालन अनुसंधान और संगठनात्मक व्यवहार की नींव बना।
समकालीन प्रासंगिकता
टेलर और फैयोल के सिद्धांत आज भी प्रभावी हैं:
- कार्य प्रवाह विश्लेषण और प्रक्रिया अनुकूलन: टेलर के समय-गति अध्ययन से प्रेरित।
- प्रबंधकीय कार्य और संगठनात्मक डिज़ाइन: फैयोल के सिद्धांत आधुनिक प्रशासनिक संरचनाओं में लागू।
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs): टेलर के मानकीकरण विचारों का विस्तार।
- प्रदर्शन मापन प्रणाली: दक्षता और जवाबदेही के आदर्शों पर आधारित।
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में भी इन सिद्धांतों का प्रभाव देखा जा सकता है, जबकि आधुनिक दृष्टिकोण मानव-संबंध, नैतिकता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को जोड़ते हैं।
निष्कर्ष
वैज्ञानिक प्रबंधन, टेलर और फैयोल के माध्यम से, आधुनिक प्रशासनिक विचारधारा की नींव है। टेलर ने कार्यस्थल दक्षता बढ़ाने में योगदान दिया, जबकि फैयोल ने प्रबंधकीय सिद्धांत और संगठनात्मक समन्वय प्रस्तुत किया। यद्यपि आलोचनाएँ हैं, उनका योगदान दक्षता और प्रबंधन के दो स्तंभों के रूप में आज भी प्रासंगिक है।
References / Suggested Readings
- Frederick W. Taylor – The Principles of Scientific Management (1911)
- Henri Fayol – General and Industrial Management (1916)
- Gulick & Urwick – Papers on the Science of Administration
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
- Prasad & Prasad – Administrative Thinkers
FAQs
Q1. वैज्ञानिक प्रबंधन क्या है?
यह कार्य और प्रबंधन को वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार व्यवस्थित करने का दृष्टिकोण है, जिससे दक्षता और संगठनात्मक नियंत्रण बढ़े।
Q2. टेलर और फैयोल में क्या अंतर है?
टेलर कार्यस्थल दक्षता और कार्य पर केंद्रित थे, जबकि फैयोल प्रबंधकीय कार्य और संगठनात्मक सिद्धांतों पर।
Q3. क्या वैज्ञानिक प्रबंधन आज भी प्रासंगिक है?
हाँ, यह कार्य प्रवाह अनुकूलन, प्रबंधकीय प्रशिक्षण, प्रदर्शन मापन और संगठनात्मक डिज़ाइन में आज भी लागू है।