वैकल्पिक दृष्टिकोण (Alternate Perspectives) : गांधी, माओ और न्यरेरे
भूमिका (Introduction)
जबकि पारंपरिक और आधुनिक प्रशासनिक सिद्धांत अक्सर पदानुक्रम, दक्षता और तर्कसंगतता पर केंद्रित रहते हैं, कुछ वैकल्पिक दृष्टिकोण इन मान्यताओं को चुनौती देते हैं। ये दृष्टिकोण नैतिकता, सामाजिक न्याय और सहभागी शासन पर जोर देते हैं। महात्मा गांधी, माओ ज़ेडॉन्ग और जूलियस न्यरेरे ऐसे विचारक हैं जिन्होंने प्रशासन के परंपरागत पश्चिमी मॉडल से बिल्कुल भिन्न विचार प्रस्तुत किए।

इन विचारकों के दृष्टिकोण यह दिखाते हैं कि प्रशासन केवल संरचना या प्रक्रिया का मामला नहीं है, बल्कि इसमें मूल्य, संस्कृति और समुदाय की भागीदारी भी केंद्रीय भूमिका निभाती है।
महात्मा गांधी: नैतिक और मूल्य-केंद्रित प्रशासन (Moral and Ethical Administration)
गांधी का प्रशासनिक दर्शन नैतिकता, सादगी और मानव-केंद्रित शासन पर आधारित है।
- स्वराज (Self-Rule): गांधी ने विकेंद्रीकृत प्रशासन का समर्थन किया, जिसमें पंचायत और ग्राम परिषद मुख्य इकाइयाँ हों। उनका मानना था कि शासन को स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना चाहिए।
- नैतिक नेतृत्व: प्रशासन को केवल आदेश देने के बजाय सत्य, अहिंसा और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर संचालित किया जाना चाहिए।
- सादगी और सेवा: नौकरशाही प्रक्रियाएँ पारदर्शी, सरल और नागरिक सेवा केंद्रित होनी चाहिए।
गांधी कहते हैं:
“The best administration is that which is closest to the people and serves them selflessly.”
“सर्वश्रेष्ठ प्रशासन वही है जो लोगों के सबसे करीब हो और निस्वार्थ सेवा करे।”
माओ ज़ेडॉन्ग: जनसांख्यिक और क्रांतिकारी प्रशासन (Revolutionary and Mass-Oriented Administration)
माओ का प्रशासनिक दृष्टिकोण क्रांतिकारी चीन के संदर्भ में उभरा और इसमें जन भागीदारी और वैचारिक मार्गदर्शन पर जोर है।
- मास लाइन (Mass Line) दृष्टिकोण: माओ ने नीतियाँ जनता से परामर्श करके तैयार करने का समर्थन किया ताकि प्रशासन वास्तविक आवश्यकताओं को प्रतिबिंबित करे।
- केन्द्रीयता और स्थानीय सहभागिता: राजनीतिक नियंत्रण केंद्रीकृत था, लेकिन कार्यान्वयन में स्थानीय समितियों और सहभागिता संरचनाओं को महत्व दिया गया।
- राजनीतिक और वैचारिक समेकन: प्रशासन को राजनीतिक चेतना और क्रांतिकारी आदर्शों से अलग नहीं किया जा सकता था।
माओ कहते हैं:
“The masses are the real heroes; the party and administration should serve their interests.”
“जनता असली नायक है; पार्टी और प्रशासन को उनके हितों की सेवा करनी चाहिए।”
जूलियस न्यरेरे: उजामा और सहभागी समाजवाद (Ujamaa and Participatory Socialism)
जूलियस न्यरेरे, तंज़ानिया के संस्थापक राष्ट्रपति, ने अफ्रीकी समाजवाद और विकेंद्रीकृत शासन के माध्यम से समान और सहभागी विकास को बढ़ावा दिया।
- उजामा (Familyhood): न्यरेरे ने सहकारी गांवों और सामूहिक स्वामित्व का समर्थन किया, जिससे सामूहिक जिम्मेदारी और सामाजिक एकता बढ़े।
- सहभागी प्रशासन: निर्णय समुदाय की भागीदारी के साथ लिए जाने चाहिए।
- नैतिक और मूल्य-केंद्रित शासन: गांधी की तरह, न्यरेरे ने सरलता, सेवा और नैतिकता पर जोर दिया।
न्यरेरे कहते हैं:
“True development cannot occur without the participation and empowerment of the people themselves.”
“सच्चा विकास तब तक संभव नहीं जब तक लोगों की भागीदारी और सशक्तिकरण न हो।”
तुलनात्मक दृष्टि (Comparative Perspective)
| पहलु | गांधी | माओ | न्यरेरे |
|---|---|---|---|
| शासन | विकेंद्रीकृत, नैतिक, ग्राम-केंद्रित | केंद्रीकृत राजनीतिक नियंत्रण, जनसहभागिता | विकेंद्रीकृत, सामुदायिक-सहभागी, सहकारी समाजवाद |
| नैतिक आधार | सत्य, अहिंसा, सेवा | क्रांतिकारी वैचारिकता, जनहित | सेवा, नैतिकता, सामूहिक जिम्मेदारी |
| सहभागिता | पंचायत और स्थानीय शासन | जनसामूहिक परामर्श, समितियाँ | सामुदायिक इनपुट, सहकारी ढाँचे |
| अनुप्रयोग | ग्रामीण प्रशासन, नैतिक नेतृत्व | क्रांतिकारी प्रशासन, नीति कार्यान्वयन | विकास प्रशासन, सामाजिक समानता |
ये विचारक दिखाते हैं कि प्रशासन केवल पदानुक्रम और दक्षता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह नैतिकता, समुदाय की भागीदारी और सामाजिक परिवर्तन पर भी आधारित हो सकता है।
आलोचना (Criticisms)
- ये दृष्टिकोण कभी-कभी आदर्शवादी माने जाते हैं, विशेषकर बड़े, आधुनिक नौकरशाहिक संगठनों में।
- कार्यान्वयन में संरचनात्मक कठोरता, राजनीतिक संघर्ष या संसाधन सीमाओं की चुनौती आती है।
- माओ के दृष्टिकोण में कभी-कभी राजनीतिक उद्देश्यों को व्यक्तिगत अधिकारों या प्रक्रियात्मक न्याय पर प्राथमिकता दी जाती है।
फिर भी, गांधी, माओ और न्यरेरे नैतिक, सहभागी और सांस्कृतिक रूप से सुसंगत प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
समकालीन प्रासंगिकता
- विकेंद्रीकृत शासन: पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन गांधी और न्यरेरे के विचारों को दर्शाते हैं।
- सहभागी विकास कार्यक्रम: जनता की सलाह और Grassroots कार्यक्रम माओ की मास लाइन दृष्टि के अनुरूप हैं।
- नैतिक नेतृत्व: आज के नेता और प्रशासक नैतिकता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने प्रशासन में शामिल कर रहे हैं।
- सांस्कृतिक संवेदनशीलता: स्थानीय मान्यताओं, परंपराओं और सामाजिक नियमों को समझना प्रभावी और समावेशी प्रशासन के लिए अनिवार्य है।
ये दृष्टिकोण याद दिलाते हैं कि प्रशासन मूल्य-तटस्थ नहीं होता; स्थायी शासन के लिए संरचना, सहभागिता, नैतिकता और सांस्कृतिक वैधता का संतुलन आवश्यक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
गांधी, माओ और न्यरेरे ने सार्वजनिक प्रशासन के वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए, जो परंपरागत नौकरशाही मॉडल को चुनौती देते हैं। ये दृष्टिकोण नैतिकता, समुदाय की भागीदारी, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक न्याय पर जोर देते हैं। यह स्पष्ट करता है कि प्रभावी प्रशासन केवल संरचना और प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करता, बल्कि मूल्य, संस्कृति और नागरिक भागीदारी पर भी आधारित होता है। ये दृष्टिकोण विकासशील राज्य, समुदाय-केंद्रित शासन और नैतिक नेतृत्व के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।
References / Suggested Readings
- Mahatma Gandhi – Constructive Programmes
- Mao Zedong – Selected Works
- Julius Nyerere – Ujamaa: Essays on Socialism
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
- Prasad & Prasad – Administrative Thinkers
FAQs
Q1. गांधी का प्रशासनिक दृष्टिकोण क्या है?
गांधी ने नैतिक, विकेंद्रीकृत शासन को महत्व दिया, स्थानीय समुदायों को सशक्त किया और सेवा-केंद्रित प्रशासन का समर्थन किया।
Q2. माओ का दृष्टिकोण गांधी से कैसे अलग था?
माओ ने केंद्रीकृत राजनीतिक नियंत्रण के साथ जनसहभागिता को जोड़ा और प्रशासन में वैचारिक और क्रांतिकारी mobilization को प्राथमिकता दी।
Q3. न्यरेरे का प्रशासन में योगदान क्या था?
न्यरेरे ने उजामा, सहभागी शासन और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा दिया, सामूहिक जिम्मेदारी और स्थानीय सशक्तिकरण पर जोर दिया।
Q4. ये वैकल्पिक दृष्टिकोण आज क्यों प्रासंगिक हैं?
ये बताते हैं कि प्रशासन में नैतिकता, संस्कृति और नागरिक भागीदारी को शामिल करना आवश्यक है, जिससे शासन स्थायी, समावेशी और न्यायसंगत बनता है।