शासन व्यवस्था: भारत और इज़राइल
(Governance: India and Israel)
शासन (Governance) से तात्पर्य उन प्रक्रियाओं, संस्थाओं और प्रथाओं से है जिनके माध्यम से सत्ता का प्रयोग किया जाता है, निर्णय लिए जाते हैं और सार्वजनिक संसाधनों का प्रबंधन होता है। शासन केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य की क्षमता, जवाबदेही, क़ानून का शासन, नागरिक भागीदारी और राज्य–समाज संबंध भी शामिल होते हैं। समकालीन राजनीति में शासन का मूल्यांकन केवल कार्यकुशलता के आधार पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक वैधता, समावेशन और पारदर्शिता के आधार पर भी किया जाता है।
India और Israel—दोनों लोकतांत्रिक राज्य हैं, किंतु उनकी शासन-व्यवस्थाएँ राज्य-निर्माण के इतिहास, संस्थागत संरचना, सामाजिक विविधता और सुरक्षा परिवेश के कारण अलग-अलग रूप ग्रहण करती हैं। यह इकाई भारत और इज़राइल में शासन का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है।
तुलनात्मक राजनीति में शासन की अवधारणा
राजनीतिक सिद्धांत में शासन का अर्थ है—
- नीति-निर्माण और उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया
- संस्थागत प्रभावशीलता और समन्वय
- जवाबदेही और क़ानून का शासन
- नागरिक भागीदारी और राज्य–समाज संबंध
“अच्छा शासन” (Good Governance) सामान्यतः लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व, प्रशासनिक क्षमता और वैधता से जोड़ा जाता है। किंतु व्यवहार में शासन की प्रकृति ऐतिहासिक विरासत, राजनीतिक संस्कृति और संरचनात्मक सीमाओं से निर्धारित होती है।
भारत में शासन: लोकतांत्रिक विस्तार और जटिलता
भारत में शासन की सबसे प्रमुख विशेषता है—विशाल आकार और गहन विविधता। एक संघीय लोकतंत्र के रूप में भारत को भाषायी, धार्मिक, जातीय और सामाजिक रूप से अत्यंत विविध जनसंख्या का शासन करना पड़ता है। इसलिए यहाँ शासन एक संविदात्मक और बहु-स्तरीय प्रक्रिया बन जाता है।
भारतीय शासन-व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं—
- एक लिखित और विस्तृत संविधान
- संघीय सत्ता-विभाजन
- स्वतंत्र न्यायपालिका
- पेशेवर नौकरशाही
भारत में शासन की वैधता मुख्यतः चुनावी लोकतंत्र और संवैधानिकता से आती है।
संघवाद, विकेंद्रीकरण और भारत में शासन
भारत में शासन की एक केंद्रीय विशेषता संघवाद है। केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियों के निर्माण में सहायता करता है। इसके साथ ही स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के माध्यम से विकेंद्रीकरण ने नागरिक भागीदारी को बढ़ाने का प्रयास किया है।
हालाँकि यह बहु-स्तरीय शासन-प्रणाली विविधता के समायोजन में सहायक है, पर इससे नीति-समन्वय, प्रशासनिक क्षमता और कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं।
भारत में शासन की प्रमुख चुनौतियाँ
भारतीय शासन को कई दीर्घकालिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है—
- नौकरशाही जटिलता और विलंब
- क्षेत्रों के बीच असमान विकास
- भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी
- केंद्र और राज्यों के बीच तनाव
फिर भी, न्यायपालिका, मीडिया, चुनाव और नागरिक समाज जैसे लोकतांत्रिक संस्थान शासन को जवाबदेह और सुधारोन्मुख बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इज़राइल में शासन: केंद्रीकरण और सुरक्षा-उन्मुख दृष्टि
इज़राइल में शासन एक अपेक्षाकृत केंद्रीकृत और सुरक्षा-प्रधान ढाँचे में कार्य करता है। राज्य की स्थापना संघर्ष और असुरक्षा की परिस्थितियों में हुई, जिससे सुरक्षा शासन की प्राथमिकता बन गई।
इज़राइली शासन-व्यवस्था की विशेषताएँ हैं—
- सशक्त कार्यपालिका
- एकसदनीय विधायिका
- प्रभावशाली न्यायपालिका
- व्यापक सुरक्षा संस्थान
भारत के विपरीत, इज़राइल के पास एकल लिखित संविधान नहीं है; शासन मुख्यतः बेसिक लॉज़ (Basic Laws) और न्यायिक व्याख्याओं पर आधारित है।
गठबंधन राजनीति और इज़राइल में शासन
इज़राइल में शासन की एक प्रमुख विशेषता है गठबंधन राजनीति। समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के कारण कोई भी दल स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं कर पाता, जिससे बहुदलीय गठबंधन सरकारें बनती हैं।
इसका प्रभाव यह होता है कि—
- नीति-निर्माण में निरंतर सौदेबाज़ी होती है
- छोटे दल असमान प्रभाव प्राप्त कर लेते हैं
- शासन की स्थिरता अक्सर कमज़ोर रहती है
यद्यपि इससे प्रतिनिधित्व बढ़ता है, पर दीर्घकालिक नीति-निरंतरता प्रभावित होती है।
शासन, सुरक्षा और लोकतंत्र (इज़राइल)
इज़राइल में सुरक्षा शासन का केंद्रीय तत्व है। आपातकालीन क़ानून, निगरानी तंत्र और सैन्य संस्थानों की भूमिका शासन-प्रक्रिया में गहराई से जुड़ी हुई है। ये उपाय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक माने जाते हैं, लेकिन इससे नागरिक स्वतंत्रताओं, समानता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर प्रश्न उठते हैं।
इस प्रकार इज़राइल में शासन लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्थायी सुरक्षा चिंता के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता है।
राज्य-क्षमता और नीति-कार्यान्वयन
भारत और इज़राइल—दोनों में राज्य-क्षमता अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देती है।
भारत में शासन की क्षमता बड़े पैमाने पर चुनाव कराने, सामाजिक कल्याण योजनाओं और न्यायिक प्रक्रिया के संचालन में स्पष्ट होती है, हालाँकि क्षेत्रीय स्तर पर कार्यान्वयन असमान रहता है।
इज़राइल में शासन-क्षमता विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवाचार-आधारित क्षेत्रों में मज़बूत है, जहाँ राज्य और रणनीतिक उद्योगों के बीच घनिष्ठ समन्वय देखने को मिलता है।
तुलनात्मक आकलन: भारत और इज़राइल
- भारत में शासन समावेशी, संघीय और प्रक्रियात्मक है
- इज़राइल में शासन अधिक केंद्रीकृत और सुरक्षा-उन्मुख है
- भारत की चुनौतियाँ आकार और विविधता से जुड़ी हैं
- इज़राइल की चुनौतियाँ गठबंधन अस्थिरता और सुरक्षा दबाव से
इन भिन्नताओं के बावजूद, दोनों शासन-प्रणालियाँ लोकतांत्रिक ढाँचे के भीतर कार्य करती हैं।
शासन और लोकतांत्रिक वैधता
दोनों देशों में लोकतांत्रिक वैधता शासन का केंद्रीय आधार है। चुनाव, न्यायिक निगरानी और सार्वजनिक बहस शासन को जवाबदेह बनाते हैं।
भारत में शासन की वैधता बहुलता और जनभागीदारी से आती है, जबकि इज़राइल में यह प्रतिनिधित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता से जुड़ी है।
निष्कर्ष
भारत और इज़राइल में शासन दो अलग-अलग लोकतांत्रिक अनुभवों को दर्शाता है। भारत में शासन संवैधानिकता, संघीय समायोजन और व्यापक लोकतांत्रिक भागीदारी पर आधारित है। इज़राइल में शासन सुरक्षा, केंद्रीकरण और गठबंधन वार्ताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
ये दोनों उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि शासन कोई एकरूप मॉडल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिस्थितियों, सामाजिक संरचनाओं और राजनीतिक प्राथमिकताओं से निर्मित प्रक्रिया है। भारत और इज़राइल का तुलनात्मक अध्ययन समकालीन लोकतंत्रों में शासन की जटिलताओं को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
संदर्भ (References)
- Rhodes, R.A.W. Understanding Governance
- Kohli, Atul. State-Directed Development
- Khilnani, Sunil. The Idea of India
- Shindler, Colin. A History of Modern Israel
- Leftwich, Adrian. States of Development