नारीवादी समीक्षा (Feminist Critique) : कैमिला स्टाइवर्स, डेलिसा बर्नियर और देवकी जैन
भूमिका (Introduction)
सार्वजनिक प्रशासन में विवाद और निर्णय लेने की प्रक्रियाएँ अक्सर पुरुष-केंद्रित धारणाओं और पदानुक्रमों पर आधारित रही हैं। नारीवादी समीक्षा यह चुनौती देती है कि प्रशासन मूलतः मूल्य-तटस्थ नहीं होता; यह सामाजिक निर्माण है और इसमें लिंग आधारित शक्ति संरचनाएँ और सांस्कृतिक धारणाएँ गहराई से प्रभावित होती हैं।

इस क्षेत्र में प्रमुख विचारक हैं कैमिला स्टाइवर्स, डेलिसा बर्नियर और देवकी जैन, जिन्होंने प्रशासनिक सिद्धांत और अभ्यास में लिंग, देखभाल और समानता को केंद्र में रखा। ये विचारक यह रेखांकित करते हैं कि नारीवादी दृष्टिकोण अपनाकर नेतृत्व, नीति निर्माण और संगठनात्मक व्यवहार को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाया जा सकता है।
कैमिला स्टाइवर्स: लिंगित नौकरशाही (Gendered Bureaucracy)
कैमिला स्टाइवर्स ने अपने प्रमुख कार्य Gender Images in Public Administration (1993) में बताया कि पारंपरिक नौकरशाही पुरुष प्रधान पदानुक्रम और नियंत्रण मॉडल पर आधारित है। उनके योगदान:
- प्रशासन में लिंगित धारणाएँ: स्टाइवर्स ने दिखाया कि पारंपरिक प्रशासनिक सिद्धांत अक्सर देखभाल, सहयोग और संबंधात्मक नेतृत्व को नजरअंदाज करते हैं, जो सामाजिक रूप से “स्त्रीलिंग” गुण माने जाते हैं।
- नौकरशाही मूल्य पुनर्परिभाषित करना: उन्होंने मानव-केंद्रित और सहभागी दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया, जिससे दक्षता और सहानुभूति का संतुलन बने।
- नीति निर्माण में प्रभाव: उन्होंने दिखाया कि लिंगित शक्ति संरचनाओं को समझकर नीतियों और प्रशासनिक अभ्यास को पुनर्गठित किया जा सकता है।
स्टाइवर्स कहती हैं:
“Public administration is not neutral; it reflects the biases of those who design and manage it.”
“सार्वजनिक प्रशासन तटस्थ नहीं है; यह उनके पूर्वाग्रहों को दर्शाता है जो इसे डिजाइन और प्रबंधित करते हैं।”
डेलिसा बर्नियर: नैतिकता, देखभाल और सहभागिता (Ethics, Care, and Participation)
डेलिसा बर्नियर नारीवादी प्रशासनिक सिद्धांत में नैतिकता, सहभागिता और देखभाल-आधारित प्रबंधन पर जोर देती हैं। मुख्य विचार:
- संबंधात्मक और नैतिक प्रशासन: बर्नियर निर्णय-निर्माण में संबंध, संवाद और सहानुभूति को महत्वपूर्ण मानती हैं।
- सहभागी ढाँचे: वे शीर्ष-नीति आधारित नौकरशाही की आलोचना करती हैं और समुदाय-केंद्रित, समावेशी प्रथाओं का सुझाव देती हैं।
- देखभाल आधारित नारीवादी नैतिकता: प्रशासन में मानव गरिमा, न्याय और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बर्नियर कहती हैं:
“Administration is most effective when it listens, responds, and nurtures human relationships rather than merely enforces rules.”
“प्रशासन तब सबसे प्रभावी होता है जब यह केवल नियम लागू करने के बजाय सुनता, प्रतिक्रिया देता और मानव संबंधों को पोषित करता है।”
देवकी जैन: विकास, लिंग और सामाजिक न्याय (Development, Gender, and Social Justice)
देवकी जैन का नारीवादी दृष्टिकोण विशेष रूप से विकास प्रशासन और वैश्विक शासन में लागू होता है, जिसमें लिंग समानता और सामाजिक न्याय पर जोर है:
- परंपरागत विकास मॉडल की आलोचना: जैन उन नौकरशाहिक ढाँचों की आलोचना करती हैं जो शीर्ष-नीति आधारित नीतियाँ लागू करते हैं और महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नजरअंदाज करते हैं।
- लिंग परिप्रेक्ष्य का समावेश: नीतियाँ यह सुनिश्चित करें कि महिलाएँ शासन और संसाधनों तक समान पहुँच रखें, जिसमें शिक्षा, राजनीति और रोजगार शामिल हैं।
- नारीवादी विकास प्रशासन: जैन सहभागी, समानता-केंद्रित और सामाजिक उत्तरदायी ढाँचे का समर्थन करती हैं।
जैन कहती हैं:
“Development without gender justice is development without humanity.”
“लिंग न्याय के बिना विकास, मानवता के बिना विकास है।”
तुलनात्मक दृष्टि (Comparative Perspective)
| पहलु | कैमिला स्टाइवर्स | डेलिसा बर्नियर | देवकी जैन |
|---|---|---|---|
| फोकस | लिंगित नौकरशाही, संबंधात्मक नेतृत्व | नैतिकता, देखभाल, सहभागी शासन | विकास प्रशासन, लिंग समानता, सामाजिक न्याय |
| आलोचना | पुरुष प्रधान पदानुक्रम और तर्कसंगतता का पूर्वाग्रह | शीर्ष-नीति प्रशासन और मानव संबंधों की उपेक्षा | पारंपरिक विकास मॉडल और महिलाओं का बहिष्कार |
| योगदान | प्रशासनिक मूल्यों का पुनर्परिभाषण | नैतिक, देखभाल-आधारित प्रबंधन | विकास और नीति में लिंग और समानता का समावेश |
| अनुप्रयोग | नौकरशाही, नेतृत्व, नीति निर्माण | शासन, HRM, सहभागी प्रशासन | विकास कार्यक्रम, घरेलू और वैश्विक नीति |
संपूर्ण रूप से ये विचारक प्रशासन को औपचारिक, पदानुक्रमिक ढाँचों से मानव-केंद्रित, सहभागी और न्यायसंगत ढाँचों की ओर ले जाते हैं, और यह स्पष्ट करते हैं कि लिंग विश्लेषण प्रभावी प्रशासन का अभिन्न अंग है।
आलोचना (Criticisms)
- नारीवादी आलोचनाएँ कभी-कभी आदर्शवादी मानी जाती हैं, यह मानते हुए कि संगठन आसानी से सहभागिता और संबंध-आधारित ढाँचे अपना सकते हैं।
- देखभाल-आधारित और लिंग-संवेदी नीतियों का कार्यान्वयन कठोर नौकरशाहिक संरचनाओं में चुनौतीपूर्ण है।
- नारीवादी प्रशासनिक प्रथाओं का मात्रात्मक मूल्यांकन सीमित है, जिससे अनुभवजन्य सत्यापन कठिन हो जाता है।
फिर भी, ये दृष्टिकोण सार्वजनिक प्रशासन को अधिक समावेशी, सहभागी और सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाते हैं।
समकालीन प्रासंगिकता
- नीति निर्माण: लिंग दृष्टिकोण को शामिल करना नीतियों को समान, सहभागी और न्यायसंगत बनाता है।
- नेतृत्व प्रशिक्षण: नारीवादी विचार सहानुभूति, संबंध कौशल और नैतिक निर्णय लेने पर जोर देते हैं।
- विकास प्रशासन: महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन पर केंद्रित कार्यक्रम देवकी जैन के योगदान को दर्शाते हैं।
- संगठनात्मक संस्कृति: सहभागिता, सहयोग और मानव-केंद्रित प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है, कठोर पदानुक्रम का मुकाबला करता है।
नारीवादी आलोचना यह दिखाती है कि प्रशासन में दक्षता, न्याय, और सहभागिता का संतुलन आवश्यक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
कैमिला स्टाइवर्स, डेलिसा बर्नियर और देवकी जैन ने सार्वजनिक प्रशासन में नारीवादी दृष्टिकोण को स्थापित किया, जो पुरुष-केंद्रित पदानुक्रमों को चुनौती देता है और देखभाल, सहभागिता और समानता को प्रमुखता देता है। उनका कार्य यह स्पष्ट करता है कि प्रभावी प्रशासन मूल्य-तटस्थ नहीं होता; इसमें लिंग अनुभवों, समावेशिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को शामिल करना आवश्यक है। नारीवादी प्रशासन सिद्धांत से नौकरशाहियाँ मानव-केंद्रित, सहभागी और न्यायसंगत शासन उपकरण बनती हैं।
References / Suggested Readings
- Camilla Stivers – Gender Images in Public Administration (1993)
- DeLysa Burnier – Ethics, Public Administration, and Feminist Theory
- Devaki Jain – Women, Development, and the State
- Nicholas Henry – Public Administration and Public Affairs
- Fadia & Fadia – Public Administration
- Prasad & Prasad – Administrative Thinkers
FAQs
Q1. सार्वजनिक प्रशासन में नारीवादी आलोचना क्या है?
यह पुरुष-केंद्रित पदानुक्रमों को चुनौती देती है और शासन में देखभाल, सहभागिता, लिंग समानता और सामाजिक न्याय को महत्व देती है।
Q2. स्टाइवर्स, बर्नियर और जैन का फोकस किस पर अलग है?
- स्टाइवर्स: लिंगित नौकरशाही और संबंधात्मक नेतृत्व
- बर्नियर: नैतिकता, देखभाल और सहभागी शासन
- जैन: विकास प्रशासन, महिलाओं का सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
Q3. नारीवादी आलोचना आज क्यों प्रासंगिक है?
यह सुनिश्चित करती है कि नीतियाँ और प्रशासन समावेशी, न्यायसंगत, सहभागी और सामाजिक रूप से उत्तरदायी हों, जिससे शासन अधिक प्रभावी और न्यायपूर्ण बनता है।