‘Rights as Trumps’ का सिद्धांत: रोनाल्ड ड्वॉर्किन (Ronald Dworkin)
आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत में अधिकारों (Rights) की भूमिका अत्यंत केंद्रीय मानी जाती है। लेकिन यह प्रश्न हमेशा बना रहता है कि जब व्यक्तिगत अधिकार और सामूहिक हित (collective interest) के बीच टकराव हो, तब किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी प्रश्न का एक प्रभावशाली उत्तर उदारवादी राजनीतिक विचारक रोनाल्ड ड्वॉर्किन (Ronald Dworkin) ने अपने प्रसिद्ध सिद्धांत “Rights as Trumps” के माध्यम से दिया।

ड्वॉर्किन के अनुसार, अधिकार ऐसे नैतिक दावे हैं जो बहुसंख्यक इच्छा (majority will), नीति-लक्ष्यों (policy goals) और उपयोगितावादी गणनाओं (utilitarian calculations) के ऊपर होते हैं। इसीलिए वे कहते हैं कि अधिकार “ट्रम्प” (trumps) की तरह कार्य करते हैं, यानी वे साधारण राजनीतिक कारणों को मात दे देते हैं। यह सिद्धांत Debates in Political Theory (DU MA) के पाठ्यक्रम में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैचारिक पृष्ठभूमि: उपयोगितावाद की आलोचना
ड्वॉर्किन का यह सिद्धांत मुख्य रूप से उपयोगितावादी सिद्धांत (Utilitarianism) की आलोचना के रूप में सामने आता है। उपयोगितावाद के अनुसार, वह नीति या निर्णय सही है जो अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम सुख (maximum happiness) उत्पन्न करे। इस दृष्टिकोण में व्यक्तिगत अधिकारों को अक्सर सामूहिक कल्याण के लिए सीमित या त्याग दिया जाता है।
ड्वॉर्किन का तर्क है कि ऐसा दृष्टिकोण व्यक्ति की नैतिक समानता (moral equality) का सम्मान नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति के अधिकार को केवल इसलिए कुचल दिया जाए क्योंकि उससे बहुसंख्यक को लाभ होगा, तो यह अन्यायपूर्ण है। इसी समस्या के समाधान के लिए ड्वॉर्किन “Rights as Trumps” की अवधारणा प्रस्तुत करते हैं।
‘Rights as Trumps’ का अर्थ
ड्वॉर्किन द्वारा प्रयुक्त “ट्रम्प” (trump) शब्द ताश के खेल से लिया गया रूपक है। जिस प्रकार ताश में ट्रम्प कार्ड अन्य सभी कार्डों पर भारी पड़ता है, उसी प्रकार अधिकार साधारण नीतिगत कारणों पर प्राथमिकता रखते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिकार हर स्थिति में स्वतः विजयी हो जाते हैं, बल्कि इसका अर्थ यह है कि अधिकारों को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि ऐसा करना अधिक सुविधाजनक, सस्ता या लोकप्रिय होगा। अधिकारों को सीमित करने के लिए अत्यंत मजबूत और नैतिक रूप से संगत कारण आवश्यक होते हैं।
अधिकार (Rights) और नीतियाँ (Policies) का अंतर
ड्वॉर्किन अपने सिद्धांत में अधिकारों और नीतियों के बीच एक स्पष्ट भेद करते हैं। नीतियाँ वे निर्णय होते हैं जो समाज के समग्र कल्याण को बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, जैसे आर्थिक विकास या प्रशासनिक सुविधा।
इसके विपरीत, अधिकार व्यक्ति के उन मूल हितों की रक्षा करते हैं जिन्हें केवल नीति-लक्ष्यों के लिए कुर्बान नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि अधिकार नीतियों पर “ट्रम्प” की तरह हावी होते हैं।
समानता और नैतिक व्यक्तिवाद (Moral Individualism)
ड्वॉर्किन का अधिकार सिद्धांत “equal concern and respect” के सिद्धांत पर आधारित है। उनके अनुसार राज्य का दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक के साथ समान चिंता और सम्मान के साथ व्यवहार करे।
अधिकार इस नैतिक प्रतिबद्धता का संस्थागत रूप हैं। “Rights as Trumps” यह सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए नुकसान न उठाना पड़े क्योंकि वह अल्पसंख्यक में है या उसकी राय लोकप्रिय नहीं है।
न्यायपालिका और संवैधानिक अधिकार
ड्वॉर्किन का सिद्धांत न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) को भी नैतिक आधार प्रदान करता है। वे मानते हैं कि न्यायालयों का यह कर्तव्य है कि वे अधिकारों की रक्षा करें, भले ही इसके लिए उन्हें निर्वाचित संसद या बहुसंख्यक निर्णय के विरुद्ध ही क्यों न जाना पड़े।
ड्वॉर्किन के अनुसार, लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान किया जाता है। इसीलिए न्यायालयों द्वारा अधिकारों की रक्षा लोकतंत्र के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके समर्थन में है।
क्या अधिकार पूर्ण (Absolute) हैं?
ड्वॉर्किन यह नहीं कहते कि अधिकार पूर्ण और असीमित होते हैं। कई बार अधिकार आपस में टकराते हैं, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता का अधिकार। ऐसे मामलों में अधिकारों के बीच नैतिक संतुलन (moral balancing) आवश्यक होता है।
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकारों को साधारण उपयोगितावादी या प्रशासनिक कारणों से सीमित नहीं किया जा सकता। उनके सीमांकन के लिए अन्य अधिकारों या गहरे नैतिक सिद्धांतों का सहारा लेना पड़ता है।
आलोचनाएँ (Criticism)
“Rights as Trumps” सिद्धांत की आलोचना यह कहकर की जाती है कि यह न्यायाधीशों को अत्यधिक शक्ति देता है और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को कमजोर करता है। सामुदायिक विचारक (Communitarians) इसे अत्यधिक व्यक्तिवादी मानते हैं।
ड्वॉर्किन इन आलोचनाओं का उत्तर देते हुए कहते हैं कि यदि लोकतंत्र में अधिकारों की रक्षा नहीं होगी, तो बहुमत का शासन अल्पसंख्यकों के लिए दमनकारी बन सकता है।
समकालीन प्रासंगिकता (Contemporary Relevance)
आज के समय में यह सिद्धांत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता, धार्मिक स्वतंत्रता, और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े विवादों में अत्यंत प्रासंगिक है। राज्य और समाज के बीच अधिकारों की सीमाओं को समझने में “Rights as Trumps” एक मजबूत नैतिक आधार प्रदान करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
रोनाल्ड ड्वॉर्किन का “Rights as Trumps” सिद्धांत उदार लोकतंत्र में अधिकारों की एक सशक्त रक्षा प्रस्तुत करता है। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति को केवल साधन (means) न समझकर एक नैतिक उद्देश्य (end) के रूप में देखा जाए। यद्यपि इसकी आलोचनाएँ हैं, फिर भी यह आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत में अधिकारों को समझने का एक अत्यंत प्रभावशाली ढाँचा प्रदान करता है।
FAQs
Q1. ‘Rights as Trumps’ का क्या अर्थ है?
अधिकार नीति और बहुमत के निर्णयों पर प्राथमिकता रखते हैं।
Q2. यह सिद्धांत किसने दिया?
रोनाल्ड ड्वॉर्किन।
Q3. यह उपयोगितावाद का विरोध कैसे करता है?
व्यक्ति को सामूहिक लाभ के लिए बलिदान करने से इंकार करता है।
Q4. क्या ड्वॉर्किन के अनुसार अधिकार पूर्ण हैं?
नहीं, लेकिन उन्हें साधारण कारणों से सीमित नहीं किया जा सकता।
Q5. यह सिद्धांत लोकतंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अल्पसंख्यकों और व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करता है।