भारत और इज़राइल में राजनीतिक दल और दल–प्रणालियाँ
(Parties and Party Systems in India and Israel)
लोकतांत्रिक राजनीति में राजनीतिक दल और दल–प्रणाली केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। दल सामाजिक हितों को संगठित करते हैं, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को संरचित करते हैं और नागरिकों तथा राज्य के बीच सेतु का कार्य करते हैं। तुलनात्मक राजनीति में दल–प्रणालियों का अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कि सामाजिक विभाजन, चुनावी नियम और ऐतिहासिक अनुभव लोकतंत्र को किस प्रकार आकार देते हैं।
India और Israel—दोनों जीवंत लोकतंत्र हैं, जिनमें प्रतिस्पर्धी बहुदलीय प्रणालियाँ विद्यमान हैं, किंतु उनकी दल–प्रणालियाँ संरचना, स्थिरता और राजनीतिक परिणामों के संदर्भ में काफ़ी भिन्न हैं।
यह इकाई भारत और इज़राइल में राजनीतिक दलों और दल–प्रणालियों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
राजनीतिक दल और दल–प्रणाली: वैचारिक परिचय
राजनीतिक दल वह संगठित समूह होते हैं जो चुनावों के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने और सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
दल–प्रणाली से तात्पर्य राजनीतिक व्यवस्था के भीतर दलों के आपसी संबंधों के स्वरूप से है—कितने दल हैं, वे कैसे प्रतिस्पर्धा करते हैं और सत्ता कैसे वितरित होती है।
दल–प्रणालियाँ निम्न कारकों से निर्मित होती हैं—
- सामाजिक विभाजन (वर्ग, धर्म, जातीयता, क्षेत्र)
- चुनावी और संस्थागत नियम
- राज्य और राष्ट्र–निर्माण के ऐतिहासिक अनुभव
भारत और इज़राइल इन कारकों के अलग-अलग संयोजन से विकसित हुई दल–प्रणालियों के उदाहरण हैं।
भारत में दल–प्रणाली का विकास
स्वतंत्रता के बाद भारत की दल–प्रणाली में गहरे परिवर्तन हुए हैं। प्रारंभिक दशकों में भारत में एकदलीय प्रभुत्व की स्थिति रही, जहाँ एक राष्ट्रीय दल लगातार चुनावी बहुमत प्राप्त करता था, जबकि विपक्षी दल सीमित प्रभाव रखते थे।
1960 के दशक के उत्तरार्ध से सामाजिक परिवर्तन, राजनीतिक चेतना और क्षेत्रीय अस्मिता के उभार ने एकदलीय प्रभुत्व को कमजोर किया। परिणामस्वरूप भारत में प्रतिस्पर्धी बहुदलीय प्रणाली का विकास हुआ।
आज भारतीय दल–प्रणाली की विशेषताएँ हैं—
- व्यापक वैचारिक अपील वाले राष्ट्रीय दल
- भाषायी, जातीय और क्षेत्रीय आधार पर मजबूत क्षेत्रीय दल
- केंद्र और राज्यों—दोनों स्तरों पर गठबंधन राजनीति
यह संरचना भारत की सामाजिक विविधता और संघीय व्यवस्था का प्रतिबिंब है।
भारतीय दलों में विचारधारा और सामाजिक विभाजन
भारत में राजनीतिक दल कठोर वैचारिक विभाजनों की अपेक्षा सामाजिक पहचानों से अधिक प्रभावित होते हैं। जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा दल-निर्माण और मतदाता लामबंदी में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
यद्यपि धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या राष्ट्रवाद जैसी विचारधाराएँ महत्वपूर्ण हैं, पर व्यवहार में दल अक्सर विभिन्न सामाजिक समूहों का विस्तृत गठबंधन होते हैं। इससे लोकतांत्रिक समावेशन तो बढ़ता है, किंतु अवसरवादी गठबंधनों और चुनावी अस्थिरता की संभावनाएँ भी उत्पन्न होती हैं।
भारत में दल–प्रणाली और शासन
भारतीय बहुदलीय प्रणाली ने शासन पर मिश्रित प्रभाव डाला है। गठबंधन सरकारों ने प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय समायोजन को बढ़ावा दिया, जिससे संघवाद और लोकतांत्रिक सहभागिता मज़बूत हुई।
साथ ही, दलों की बहुलता कभी-कभी निर्णय-प्रक्रिया को जटिल बना देती है और नीति-गत निरंतरता को प्रभावित करती है। फिर भी भारतीय दल–प्रणाली ने लोकतांत्रिक निरंतरता को बनाए रखते हुए नई सामाजिक माँगों को आत्मसात करने की उल्लेखनीय क्षमता दिखाई है।
इज़राइल में दल–प्रणाली का विकास
इज़राइल की दल–प्रणाली आरंभ से ही अत्यधिक खंडित रही है। स्वतंत्रता के साथ अपनाई गई समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली ने अनेक दलों के गठन को प्रोत्साहित किया।
इज़राइल में दल निम्न आधारों पर विकसित हुए—
- समाजवादी, उदारवादी और राष्ट्रवादी जैसी वैचारिक धाराएँ
- धार्मिक–धर्मनिरपेक्ष विभाजन
- यहूदी समाज के भीतर जातीय–सांस्कृतिक भिन्नताएँ
- अरब–फ़िलिस्तीनी अल्पसंख्यक दल
कोई भी दल लंबे समय तक पूर्ण प्रभुत्व स्थापित नहीं कर पाया, जिससे गठबंधन राजनीति स्थायी विशेषता बन गई।
इज़राइल में विचारधारा, पहचान और दल
इज़राइल में विचारधारा भारत की तुलना में अधिक स्पष्ट और मुखर भूमिका निभाती है। वाम–दक्षिण विभाजन, सुरक्षा नीति और धार्मिक मुद्दे दल–प्रतिस्पर्धा के केंद्र में रहते हैं।
साथ ही, धार्मिक और जातीय दल—even सीमित जनसमर्थन के बावजूद—गठबंधन वार्ताओं में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। इस प्रकार इज़राइली दल–प्रणाली में वैचारिक ध्रुवीकरण और पहचान–आधारित विखंडन साथ-साथ मौजूद हैं।
इज़राइल में दल–प्रणाली और शासन
इज़राइल की खंडित दल–प्रणाली ने शासन को कठिन बनाया है। गठबंधन सरकारें अपरिहार्य हैं और अक्सर अल्पकालिक होती हैं। छोटे दल “किंगमेकर” की भूमिका निभाते हैं, जिससे नीतिगत स्थिरता प्रभावित होती है।
हालाँकि समानुपातिक प्रतिनिधित्व समावेशन सुनिश्चित करता है, पर इसके परिणामस्वरूप बार-बार चुनाव, सरकारों का पतन और संस्थागत तनाव भी देखने को मिलता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और इज़राइल
तुलनात्मक रूप से—
- भारत की दल–प्रणाली एकदलीय प्रभुत्व से बहुदलीय प्रतिस्पर्धा की ओर विकसित हुई; इज़राइल की आरंभ से खंडित रही
- भारत में दल सामाजिक और क्षेत्रीय विभाजनों से अधिक प्रभावित हैं; इज़राइल में विचारधारा, धर्म और सुरक्षा से
- भारत में गठबंधन राजनीति संघीय समायोजन को दर्शाती है; इज़राइल में संरचनात्मक विखंडन को
इन अंतरों के बावजूद, दोनों प्रणालियाँ लोकतंत्र में दलों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करती हैं।
दल–प्रणालियाँ और लोकतांत्रिक स्थिरता
भारत और इज़राइल दोनों यह दिखाते हैं कि बहुदलीय प्रणालियाँ लोकतंत्र को बनाए रख सकती हैं, किंतु भिन्न तरीकों से। भारत में दल–प्रणाली ने विविध समूहों को चुनावी राजनीति में शामिल कर लोकतांत्रिक स्थिरता को मज़बूत किया। इज़राइल में प्रतिनिधित्व तो सुनिश्चित हुआ, पर शासन की स्थिरता कमज़ोर रही।
निष्कर्ष
भारत और इज़राइल की दल–प्रणालियाँ लोकतंत्र के दो अलग रास्ते प्रस्तुत करती हैं। भारत की बहुदलीय प्रणाली सामाजिक विविधता, संघवाद और अनुकूलनशील गठबंधन-निर्माण को प्रतिबिंबित करती है। इज़राइल की दल–प्रणाली वैचारिक ध्रुवीकरण, पहचान-राजनीति और समानुपातिक प्रतिनिधित्व के प्रभावों को दर्शाती है।
ये उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि दल–प्रणालियाँ केवल चुनावी व्यवस्थाएँ नहीं होतीं, बल्कि वे ऐतिहासिक अनुभवों, सामाजिक संरचनाओं और संस्थागत विकल्पों में गहराई से निहित होती हैं। लोकतांत्रिक शासन को समझने के लिए उनका अध्ययन अनिवार्य है।
संदर्भ (References)
- Sartori, Giovanni. Parties and Party Systems
- Lijphart, Arend. Patterns of Democracy
- Yadav, Yogendra. State Politics in India
- Shindler, Colin. A History of Modern Israel
- Chhibber, Pradeep & Kollman, Ken. The Formation of National Party Systems